नोएडा में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को कोर्ट ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया। दरअसल, 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन हुआ था। इस मामले में लखनऊ के पत्रकार सत्यम वर्मा और नोएडा की एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया था। दोनों पर सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग जैसे आरोप लगाए गए थे। आकृति को 11 अप्रैल को मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। लाइव लॉ के मुताबिक, मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने आकृति के खिलाफ डिटेंशन ऑर्डर रद्द करते हुए कहा- आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक 'गढ़ी हुई कहानी' पर आधारित थी। अगर किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। कोर्ट ने आकृति को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह रकम नोएडा की DM मेधा रूपम के वेतन से देने को कहा गया है। इससे पहले मंगलवार को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था कि FIR दर्ज करने से पहले आकृति को शांति भंग का नोटिस दिया गया था या नहीं। कोर्ट ने मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और वॉट्सऐप चैट की डिटेल भी मांगी थी। 3 महीने पहले भास्कर रिपोर्ट में भी यही सवाल उठे थे नोएडा में प्रदर्शन के बाद दैनिक भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट की थी। करीब 3 महीने पहले की इस रिपोर्ट में भी ऐसे ही सवाल उठाए गए थे, जिनमें से कुछ सवाल अब हाईकोर्ट ने सरकार से पूछे हैं। भास्कर रिपोर्ट में सवाल उठाया गया था कि आकृति को 11 अप्रैल को ही मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था, तो 13 अप्रैल को हुई हिंसा भड़काने में उनकी भूमिका कैसे हो सकती है? रिपोर्ट में ये सवाल भी उठे थे— सत्यम वर्मा को पुलिस 17 अप्रैल को लखनऊ से ले गई, लेकिन उनकी गिरफ्तारी 19 अप्रैल को दिखाई गई। सत्यम उस समय नोएडा में नहीं थे। वे पुलिस के संपर्क में थे और पुलिस के कहने पर आर्टिकल भी हटा दिया था। पुलिस ने प्रेस नोट में दावा किया था कि सत्यम को विदेशों से 1 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली। इससे जुड़े सबूत पुलिस ने कोर्ट में पेश क्यों नहीं किए? FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई? एक ही मामले में कई FIR क्यों दर्ज की गईं? पढ़ें पूरी खबर कोर्ट ने कहा- ऐसा लग रहा गिरफ्तारी के बाद नोटिस की कार्रवाई की गई यूपी सरकार ने कोर्ट में बताया कि आकृति चौधरी को 12 अप्रैल सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस भी दिया था। आरोप है कि आकृति ने मजदूरों की भीड़ को आगजनी और पथराव के लिए उकसाया था। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने पूछा कि क्या आकृति को इससे पहले BNSS की धारा 126 के तहत नोटिस दिया गया था। सरकार ने इससे इनकार किया। धारा 126 शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी है। जज ने कहा कि धारा 130 के तहत कार्रवाई से पहले धारा 126 की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। कोर्ट ने पुलिस की सामान्य डायरी में दर्ज जानकारी भी देखी। इसके बाद सरकार के उस दावे पर सवाल उठाए गए, जिसमें कहा गया था कि पहले नोटिस दिया गया और उसके बाद आकृति को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि पहले आकृति को गिरफ्तार किया गया और बाद में नोटिस की कार्रवाई की गई। कोर्ट ने उनके खिलाफ मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप पर भी सवाल उठाए। सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के लिए लोग 11 अप्रैल से ही जुटने लगे थे। इस पर जस्टिस श्रीधरन ने पूछा कि अगर 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी, तो उस दिन आकृति ने ऐसी कौन-सी हिंसा भड़काई थी? यानी कोर्ट के सवाल का आधार यह था कि आकृति की गिरफ्तारी पहले हुई, जबकि जिस हिंसा के लिए उन पर आरोप लगाया गया, वह बाद में हुई। कल कोर्ट ने वीडियो दिखाने को कहा था, सरकार ने समय मांगा तो इनकार किया मंगलवार की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से ऐसे वीडियो पेश करने को कहा, जिनसे साबित हो कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पथराव या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया था। सरकार ने और समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने कहा कि आकृति करीब पांच महीने से जेल में हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि रिकॉर्ड में कहां लिखा है कि आकृति ने लोगों को पथराव के लिए बुलाया था और क्या इसका कोई वीडियो सबूत है। सरकार ने आरोपपत्र और गवाहों के बयानों का हवाला दिया। इस पर जस्टिस श्रीधरन ने पूछा कि गवाहों ने आकृति का नाम किस आधार पर लिया और वीडियो में ऐसा क्या है, जिससे हिंसा के लिए उकसाने का आरोप साबित होता है। आकृति चौधरी के बारे में जानिए- आकृति चौधरी दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। नोएडा मजदूर प्रदर्शन के मामले में यूपी पुलिस ने 13 मई को उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया था। इसी मामले में कार्यकर्ता और पत्रकार सत्यम वर्मा पर भी NSA के तहत कार्रवाई हुई थी। उस समय नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने आकृति और अन्य आरोपियों के खिलाफ मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो सबूत होने का दावा किया था। निचली अदालत से जमानत नहीं मिलने पर आकृति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पहले हाईकोर्ट जाने को कहा, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती दी। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी के 3.5 लाख कर्मचारियों की सैलरी 7 हजार बढ़ी: 50 लाख तक बीमा मिलेगा; योगी ने आउटसोर्स सेवा निगम की शुरुआत की यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की वेबसाइट का बुधवार को सीएम योगी ने लोकार्पण किया। उन्होंने निगम के लोगो (Logo) का अनावरण करने के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी बांटे। निगम के शुरू होने के साथ प्रदेश के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। पढ़ें पूरी खबर