राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी आरक्षण और उप वर्गीकरण के मुद्दे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। 'आदिवासी आरक्षण मंच' के तत्वावधान में रविवार को हुई एक बैठक में जनजाति वर्ग की तीन सूत्री मांगों को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। आगामी 4 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर एक विशाल आरक्षण महासम्मेलन एवं महारैली का आयोजन किया जाएगा। ​पंचायती राज चुनावों से पहले मांगें पूरी करने की चेतावनी आदिवासी आरक्षण मंच की केंद्रीय कमेटी के सलाहकार प्रो. कमलकांत कटारा की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की भारी उपस्थिति में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में वक्ताओं ने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि पंचायती राज चुनाव से पहले वंचित जनजाति समुदाय की तीन सूत्री मांगें पूरी की जाएं। ​75 साल से एक ही वर्ग को मिल रहा लाभ बैठक में वक्ताओं ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि 1950 से आरक्षण लागू होने के बावजूद ऐतिहासिक भील समुदाय सहित अन्य 10 जनजातियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट के उप वर्गीकरण पर आए ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए मंच ने आरोप लगाया कि राजस्थान में 1956 से केवल 3 प्रतिशत मीणा समुदाय ही 12 प्रतिशत आरक्षण पर एकाधिपत्य जमाए हुए है, जबकि शेष 10 प्रतिशत जनजाति समुदाय पूरी तरह वंचित है। हरियाणा और कर्नाटक की तर्ज पर राजस्थान सरकार को भी तुरंत जनजाति वर्ग में उप वर्गीकरण लागू करना चाहिए। ​महारैली को सफल बनाने का आह्वान बैठक में सरपंच संघ के जिला उपाध्यक्ष नानूलाल डामोर, एडवोकेट गणपतलाल डामोर, पूंजीलाल डामोर, हेमंत गरासिया, जिला सह संयोजक राजेंद्र पटेल, प्रमोद डामोर, गणेशलाल डामोर, आशीष पारगी, अनिल डामोर, बहादुर खांट, मुकेश डामोर और मगनलाल डिंडोर समेत कई प्रमुख वक्ताओं ने विचार रखे। सभी ने समाज के भविष्य को संवारने के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक ताकत दिखाने और 4 अक्टूबर के महासम्मेलन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया।