साल 1919 में स्थापित बारां नगर परिषद के 106 साल के इतिहास में अब तक केवल एक बार ही किसी महिला को शहर की सरकार का मुखिया बनने का मौका मिला है। अब एक बार फिर इतिहास दोहराने जा रहा है, इस बार भी सभापति की कुर्सी पर महिला ही बैठेगी। वर्ष 2020 में हुए निकाय चुनाव में नगर परिषद के इतिहास की पहली महिला सभापति के रूप में ज्योति पारस चुनी गई थीं। उस समय सभापति का पद अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था। पूर्व सभापति कैलाश पारस की धर्मपत्नी ज्योति पारस ने वार्ड नंबर 17 से पार्षद का चुनाव 274 मतों के अंतर से जीता था। 2020 के चुनाव में कुल 60 वार्डों में से एससी वर्ग की 8 महिलाएं पार्षद बनकर आई थीं, जिनमें से कांग्रेस की ज्योति पारस ने सभापति पद का चुनाव 20 मतों से जीता था। इस बार सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित इस बार होने जा रहे निकाय चुनाव में सभापति का पद अनारक्षित वर्ग की महिला के लिए तय हुआ है। ऐसे में एक बार फिर शहर की कमान महिला के हाथों में ही रहेगी। आरक्षण लॉटरी में 60 में से 20 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, लेकिन सभापति पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण कई अन्य वार्डों से भी महिला उम्मीदवार ताल ठोकेंगी, क्योंकि कई दावेदारों की सीधी नजर सभापति की कुर्सी पर है। 7,702 मतदाता बढ़े वर्ष 2020 के चुनाव में बारां नगर परिषद क्षेत्र में कुल 83 हजार 125 मतदाता थे। इस बार मतदाताओं की संख्या बढ़कर 90 हजार 827 हो गई है, यानि इस बार 7,702 मतदाता बढ़ गए हैं। पिछली बार 42 हजार 469 पुरुष, 40 हजार 654 महिला और 2 ट्रांसजेंडर मतदाता थे। इस बार पुरुष मतदाताओं में 3604 और महिला मतदाताओं में 4097 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 2 से बढ़कर 3 हो गई है।