इस शिक्षक दिवस पर सरकारी शिक्षक अल्लारक खां पठान की पीड़ा ​का जिक्र। जो तीन साल से गाल ब्लैडर और लिवर कैंसर से जूझ रहे हैं। वे बीमारी से ज्यादा इलाज की स्वीकृति की प्रक्रिया से परेशान हैं। अब तक 35 कीमो थैरेपी हो चुकी है। अब इम्यूनोथेरेपी की भी सलाह के लिए आरजीएचएस की स्वीकृति प्रक्रिया के चलते 15 दिन से इलाज रुका हुआ है। पठान के अनुसार एक सप्ताह की थैरेपी पर ही करीब 30 हजार रुपए का खर्च आता है। आरजीएचएस में स्वीकृति की सीमा और प्रक्रिया के कारण उपचार समय पर नहीं हो पा रहा है। अल्लारक खां पठान जिला उपाध्यक्ष, प्राशि, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, पाली से जुड़े हैं। उपचार की स्वीकृति के लिए ऑनलाइन पत्रावली जयपुर भेजी, लेकिन समय पर अनुमति नहीं मिली। एमडीएम मेडिकल कॉलेज से दो पत्र भरवाए कर एसएसओ आइडी से ऑनलाइन एसएमएस स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट ऑनलाइन करवाया गया कॉल आने पर जयपुर भी जाकर आ गए। पठान का कहना है कि कैंसर जैसे गंभीर रोगों के मरीजों के लिए प्रक्रिया सरल और त्वरित होनी चाहिए। चिकित्सक की अनुशंसा के आधार पर आवश्यक जीवनरक्षक उपचार को तत्काल स्वीकृति मिलनी चाहिए।