अगस्त खत्म होने के साथ ही चित्तौड़गढ़ जिले में मानसून लगभग थम गया है। पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण एक तरफ तेज उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है तो दूसरी तरफ जिले के ज्यादातर बांध अब भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। इस बार 1 जून से अब तक जिले में कुल 528.75 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत का सिर्फ 70.50 प्रतिशत है। बारिश का यह आंकड़ा पिछले सालों की तुलना में काफी कम माना जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले के 41 बांधों में अभी तक पानी की आवक तक शुरू नहीं हुई है। मौसम विभाग ने फिलहाल अगले कुछ दिन मानसून कमजोर रहने की बात कही है, हालांकि 3 सितंबर के बाद फिर से बारिश का नया दौर शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। अब किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजर सितंबर की बारिश पर टिकी हुई है। जिले में बारिश का आंकड़ा असमान, कहीं अच्छी तो कहीं बहुत कम इस बार जिले में बारिश सभी इलाकों में एक जैसी नहीं हुई। कुछ जगहों पर अच्छी बारिश हुई तो कई इलाके अब भी पानी का इंतजार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा 819 एमएम बारिश निंबाहेड़ा में दर्ज की गई, जबकि सबसे कम सिर्फ 359 एमएम बारिश भूपालसागर में हुई। इसके अलावा कपासन में 384 एमएम, रावतभाटा में 391 एमएम और बड़ीसादड़ी में 410 एमएम बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से काफी कम है। वहीं चित्तौड़गढ़ शहर में 541 एमएम, गंगरार में 614 एमएम, भदेसर में 638 एमएम, बस्सी में 664 एमएम, बेगूं में 529 एमएम, राशमी में 506 एमएम और डूंगला में 490 एमएम बारिश हुई। आंकड़े बताते हैं कि जिले के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का अंतर काफी ज्यादा रहा, जिसका असर अब खेतों और जलाशयों में साफ दिखाई देने लगा है। बांध अब भी नहीं भर पाए, कई जगह पानी की चिंता बढ़ी कम बारिश का सबसे बड़ा असर जिले के बांधों और जलाशयों पर दिखाई दे रहा है। इस बार जिले के कुल 96 बांधो में से 41 बांध ऐसे हैं, जिनमें अब तक पानी की आवक शुरू नहीं हुई हैं। सिर्फ 10 छोटे बांध और तालाब ही पूरी तरह भर पाए हैं। हर साल की तरह इस बार भी कपासन, भूपालसागर और रावतभाटा क्षेत्र में पानी की कमी ज्यादा नजर आ रही है। बड़े बांधों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गंभीरी बांध में अब तक सिर्फ 25.8 प्रतिशत पानी आया है। वागन बांध 15.2 प्रतिशत तक ही भर पाया है। घोसुंडा बांध में 42.7 प्रतिशत पानी है, जबकि भोपालसागर बांध में सिर्फ 1.5 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। मातृकुंडिया बांध में भी केवल 5.6 प्रतिशत पानी पहुंचा है। राहत की बात सिर्फ औराई और बस्सी बांध से जुड़ी है, जहां क्रमशः 84 प्रतिशत और 76 प्रतिशत तक पानी की आवक हो चुकी है। बाकी बड़े जलाशयों की स्थिति अभी भी चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है। कैचमेंट में भी कम बारिश का असर साफ दिखा बांधों के कैचमेंट एरिया में भी इस बार उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई। यही वजह है कि जलाशयों में पानी की आवक लगातार कमजोर रही। 1 जून से अब तक गंभीरी बांध क्षेत्र में 508 एमएम, वागन बांध में 375 एमएम, बस्सी डैम में 636 एमएम, औराई डैम में 649 एमएम, बड़गांव डैम में 524 एमएम, भोपालसागर डैम में 347 एमएम, कपासन डैम में 399 एमएम, संदेसर बांध में 410 एमएम और मातृकुंडिया बांध क्षेत्र में 378 एमएम बारिश दर्ज की गई है। जिन बांधों के कैचमेंट में कम बारिश हुई, वहां जलभराव भी काफी पीछे रह गया। इसका असर आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है, अगर सितंबर में अच्छी बारिश नहीं हुई। बारिश रुकी तो उमस ने बढ़ाई मुश्किल, अब सितंबर से उम्मीद बारिश रुकने के बाद जिले में उमस लगातार बनी हुई है। दिनभर तेज धूप और नमी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में काम करने वाले किसानों से लेकर बाजारों में निकलने वाले लोगों तक सभी गर्मी और चिपचिपे मौसम से परेशान हैं। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल अगले कुछ दिनों तक चित्तौड़गढ़ जिले में मानसून कमजोर रहेगा और व्यापक बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि विभाग ने अनुमान जताया है कि 3 सितंबर से उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां फिर शुरू हो सकती हैं। 4 से 7 सितंबर के बीच उदयपुर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जिसका असर चित्तौड़गढ़ जिले में भी देखने को मिल सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो जिले के बांधों, खेतों और जल स्रोतों को कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल पूरे जिले की नजर सितंबर की पहली अच्छी बारिश पर टिकी हुई है, क्योंकि यही बारिश इस बार के कमजोर मानसून की कुछ हद तक भरपाई कर सकती है।