चुनावी प्रक्रिया के सबसे अहम दिन सोमवार को चित्तौड़गढ़ नगर परिषद चुनाव का माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सुबह से ही कलेक्ट्रेट परिसर और तहसील कार्यालय में राजनीतिक हलचल शुरू हो गई। संभावित प्रत्याशी अपने-अपने प्रस्तावकों और समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचने लगे। जैसे-जैसे समय बढ़ रहा है, परिसर में भीड़ भी बढ़ती जा रही है। हर तरफ चुनाव की चर्चा है और हर दावेदार अपनी मौजूदगी दिखाने में जुटा है। अंतिम दिन होने के कारण अधिकांश दावेदार आज ही अपना नामांकन दाखिल करने की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। वहीं राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी लगातार अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के संपर्क में बने हुए हैं, क्योंकि आज के बाद चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ होने लगेगी। चार जगहों पर हो रहे नामांकन, सुबह से लगी उम्मीदवारों की कतार नगर परिषद के 60 वार्डों के नामांकन चार अलग-अलग कमरों में जमा किए जा रहे हैं। वार्ड 1 से 15 तक के उम्मीदवार जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय कक्ष में, वार्ड 16 से 30 तक के दावेदार उपखंड मजिस्ट्रेट न्यायालय कक्ष में, वार्ड 31 से 45 तक के उम्मीदवार तहसीलदार न्यायालय कक्ष में और वार्ड 46 से 60 तक के प्रत्याशी तहसील कार्यालय के बैठक कक्ष में अपने नामांकन जमा कर रहे हैं। सुबह से ही इन सभी जगहों पर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की आवाजाही शुरू हो गई। कई दावेदार दस्तावेजों की अंतिम जांच करवाते नजर आए तो कई अपने प्रस्तावकों के साथ औपचारिकताएं पूरी करने में लगे रहे। शनिवार को भी कुछ वार्डों से कई उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके थे, लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ और हलचल आज अंतिम दिन देखने को मिल रही है। टिकट का इंतजार जारी, लेकिन प्रचार पहले से शुरू हालांकि कई वार्डों में अभी राजनीतिक दलों की ओर से अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा होना बाकी है, लेकिन इससे पहले ही चुनावी प्रचार शुरू हो चुका है। संभावित उम्मीदवार अपने वार्डों में लोगों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। घर-घर जाकर मुलाकात करना, छोटे-छोटे जनसंपर्क कार्यक्रम करना और सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहना उनकी रणनीति का हिस्सा बन गया है। टिकट की आधिकारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद कई दावेदार खुद को मजबूत दावेदार के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे साफ है कि इस बार चुनाव में सोशल मीडिया भी अहम भूमिका निभाने वाला है और उम्मीदवार शुरुआत से ही अपनी पहचान मजबूत करने में जुट गए हैं। डमी उम्मीदवार और डैमेज कंट्रोल भी बना रणनीति का हिस्सा नामांकन के अंतिम दिन कई वार्डों में डमी उम्मीदवार भी अपने फॉर्म जमा करने पहुंचे हैं। राजनीतिक जानकार इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। दूसरी ओर, टिकट वितरण को लेकर किसी तरह की नाराजगी सामने नहीं आए, इसके लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने स्तर पर डैमेज कंट्रोल में भी जुटी हैं। जिन दावेदारों को टिकट मिलने या नहीं मिलने को लेकर असमंजस है, उनसे लगातार बातचीत की जा रही है ताकि कोई बगावत की स्थिति नहीं बने। अब पूरे दिन नामांकन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी और इसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची आने का इंतजार शुरू होगा। उसी के साथ यह भी साफ हो जाएगा कि किस वार्ड में मुकाबला सीधा रहेगा और किन सीटों पर बागी या डमी उम्मीदवार चुनाव को दिलचस्प बना सकते हैं।