निगम चुनाव नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी वार्डों में उम्मीदवारों की तस्वीर साफ है। बड़े नेताओं ने कई बागियों को मना लिया, उनके नामांकन भी उठवा दिए, लेकिन कई बागी ऐसे हैं, जो स्थानीय विधायक, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेताओं के नजदीकी हैं और अब भी बागी हैं। ऐसे 18 बागी हैं। अचरज की बात तो यह है कि खुद के नजदीक होने के बावजूद विधायक इनके नाम वापस नहीं करवा पाए। चर्चा तो यह भी है कि बागियों को मनाने के प्रयास तक नहीं हुए। अब यही पार्टी के लिए चुनौती बन गए। बता दें कि भाजपा और कांग्रेस के 47 बागी मैदान में हैं। वार्ड 77; पूर्व पार्षद के बागी होने से भाजपा प्रत्याशी प्रेम कुमार जैन की मुश्किलें बढ़ी मालवीय नगर के वार्ड-77 में भाजपा ने प्रेम कुमार जैन को टिकट दिया। कांग्रेस से किरण मैदान में हैं। भाजपा से पूर्व पार्षद रमेशचंद सैनी ने निर्दलीय ताल ठोक दी है। सैनी विधायक कालीचरण सराफ के करीबी हैं। वार्ड 80; कालीचरण के विश्वसनीय जितेंद्र की पत्नी ने ही भाजपा के खिलाफ खोला मोर्चा मालवीय नगर के वार्ड 80 में कांग्रेस की सिमरन कौर व भाजपा की दलजीत कौर के बीच टक्कर मानी जा रही। भाजपा से बागी जितेंद्र चौधरी की पत्नी रेणू के मैदान में आने से समीकरण बदले। जितेंद्र विधायक सराफ के विश्वसनीय हैं। वार्ड 110; पूर्व विधायक मोहनलाल गुप्ता की कट्टर समर्थक ही भाजपा की ज्योति के सामने किशनपोल के वार्ड-110 में भाजपा ने ज्योति खंडेलवाल को मैदान में उतारा। भाजपा से बागी बीना मेठी चुनाव लड़ रही हैं। बीना मेठी को पूर्व विधायक मोहनलाल गुप्ता का कट्टर समर्थक माना जाता है। कांग्रेस से सुनीता मेथी प्रत्याशी है। वार्ड 135; बालमुकुंदाचार्य के करीबी चिमन ने ही बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें हवामहल विधानसभा के वार्ड 135 में भाजपा के विमल अग्रवाल, कांग्रेस के रवि शर्मा और भाजपा से बागी चिमनलाल सैनी मैदान में हैं। चिमनलाल ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। सैनी विधायक बालमुकुंदाचार्य के करीबी हैं। इसके बावजूद नामांकन वापस नहीं हुआ।