कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए छह राज्यों के प्रभारी महासचिव/प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को अब छत्तीसगढ़ के स्थान पर पंजाब की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा ने भी पिछले दिनों पंजाब का प्रभारी राजस्थान के ही डॉ. सतीश पूनियां को बनाया था। यानी अब दोनों प्रमुख दलों के पंजाब प्रभारी राजस्थान से ही होंगे। कांग्रेस ने असम प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह को हटाकर उनके स्थान पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिम्मेदारी दी है। जितेंद्र सिंह ने असम में पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए प्रभारी पद से इस्तीफा दिया था। वहीं, रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। सुरजेवाला के पास कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। इसके अलावा सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. सिरीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। जितेंद्र सिंह, चेन्नीथला और मणिकम टैगोर के पास अब राज्यों का प्रभार नहीं है। मुकुल वासनिक एआईसीसी महासचिव के पद पर बने रहेंगे। पूनिया-पायलट में फिर सियासी मुकाबला, एक संगठन विस्तार तो दूसरा गुटबाजी साधने में जुटेगा राजस्थान की राजनीति में एक-दूसरे के मुकाबले रहे भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट अब पंजाब की सियासत में आमने-सामने होंगे। भाजपा ने कुछ दिन पहले पूनियां को पंजाब प्रभारी बनाया था, वहीं कांग्रेस ने अब पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी है। खास बात यह है कि राजस्थान में दोनों करीब 10 महीने तक अपनी-अपनी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए आमने-सामने रहे थे। पूनिया के सामने पंजाब में भाजपा के संगठन को मजबूत कर विस्तार देने की चुनौती है। हरियाणा प्रभारी के तौर पर संगठन विस्तार का अनुभव उनके काम आएगा। वहीं पायलट के सामने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को साधकर चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने की चुनौती है। दिलचस्प संयोग यह भी है कि पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी रह चुके हैं। अब पायलट पंजाब के प्रभारी हैं और रंधावा उनके सामने महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। ऐसे में राजस्थान की सियासी जंग का असर अब पंजाब के चुनावी मैदान में भी दिखाई देगा।