कोटा की 15 साल की तन्वी की मौत के मामले एम्स नई दिल्ली ने जांच कमेटी बनाई है। ये कमेटी मरीज के इलाज, विशेषज्ञों की राय, मेडिकल रिकॉर्ड और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की विस्तार से जांच करेगी। एम्स ने कहा- अंतिम निष्कर्ष पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और समिति की जांच पूरी होने के बाद ही निकाले जाएंगे। एम्स के मुताबिक- तन्वी को साल 2012 में पहली बार इलाज के लिए एम्स के कार्डियोलॉजी OPD में लाया गया था। जांच में पता चला कि तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया नामक जटिल जन्मजात दिल की बीमारी थी। इस बीमारी में हार्ट से फेफड़ों तक खून के बहाव का सामान्य मार्ग अनुपस्थित होता है। सभी जांचों के बाद साल 2017 में डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट की जटिल बनावट के कारण सर्जरी संभव नहीं है। परिवार को दवा के जरिए इलाज की सलाह दी गई थी। एम्स के अनुसार- 1 सितंबर की सुबह करीब 2:50 बजे तन्वी को अचानक कमजोरी महसूस हुई। ऑक्सीजन लेवल 48 प्रतिशत रह गया। डॉक्टरों ने लंबे समय तक रिससिटेशन (पुनर्जीवन) के लिए प्रयास किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उधर, कमेटी बनाने पर तन्वी के पिता मुकेश ने कहा- कोई भी कमेटी बना लो, उससे क्या होगा। जब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा और एक्शन नहीं लेंगे, तब तक कमेटी का क्या मतलब है। हम इलाज में लापरवाही को लेकर FIR दर्ज करवाएंगे। पिता बोले- 2015 में सर्जरी की डेट तय थी, फिर टालते गए मुकेश ने बताया- पहली बार 2 सितंबर 2015 को बच्ची के ऑपरेशन के लिए डेट तय कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद दीपावली के लिए कहा। फिर कहा गया कि कंडयूट (कृत्रिम नली या ट्यूब) उपलब्ध नहीं है। इसके बाद डॉक्टर ने हमें किसी संजीव के नंबर दिए। संजीव को तीस हजार रुपए दिए, तब एम्स में कंडयूट पहुंचा। इसके बाद भी ऑपरेशन नहीं हुआ और इतने साल से लगातार टालमटोल करते गए। मुकेश ने कहा- हमने दिल्ली में पुलिस को भी कॉल किया था। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवा दिया। हर बार इसी उम्मीद से दिल्ली जाते कि ऑपरेशन हो जाएगा घरवालों के मुताबिक- डॉक्टरों ने हर 2-3 महीने में जांच के लिए बुलाया था। परिवार हर बार इस उम्मीद में कोटा से दिल्ली जाता कि इस बार बेटी का ऑपरेशन हो जाएगा, लेकिन सर्जरी की तारीख ही मिलती रही। 13 साल में 100 से भी ज्यादा बार तन्वी को लेकर एम्स पहुंचे थे, लेकिन जरूरी सर्जरी नहीं हो पाई। 9वीं क्लास की छात्रा थी तन्वी तन्वी के पिता मुकेश रेडीमेड कपड़ों की शॉप पर काम करते हैं। तन्वी 9वीं कक्षा की छात्रा थी। तन्वी के पिता मुकेश ने बताया कि 2 साल की उम्र में दिल की बीमारी का पता चला था। उसी समय से दिल्ली एम्स में तन्वी का इलाज चल रहा था। --------- ये खबर भी पढ़ें... 13-साल इलाज की तारीख मिलती रही,आखिर बच्ची की मौत हुई:कोटा की मासूम के दिल में छेद था, परिवार दिल्ली एम्स के चक्कर काटता रहा दिल्ली एम्स में इलाज के लिए 13 साल से चक्कर काट रही कोटा के गुमानपुरा की 15 साल की छात्रा तन्वी की मौत हो गई। तन्वी 2 साल की उम्र से वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) यानी दिल में छेद की बीमारी से जूझ रही थी। (पूरी खबर पढ़ें)