भीलवाड़ा में कांग्रेस के 17 उम्मीदवारों के सिंबल जमा नहीं होने के मामले में जांच रिपोर्ट प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खड़गे को भिजवा दी है। चुनाव प्रभारी मुकेश वर्मा की जांच रिपोर्ट में दो प्रमुख बिंदु सामने सामने आए हैं। पहली गलती स्थानीय नेताओं की मानी गई जिसमें स्थानीय सहमति नहीं बन पाने और गुटबाजी का मुद्दा है। रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि पीसीसी से समय पर सिंबल समय पर पहुंचा दिए थे। अगर स्थानीय सहमति समय पर बन जाती तो सिंबल जमा नहीं होने जैसी स्थिति ही नहीं बनती। दूसरे बिंदु में रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में लिखा है कि विवाद के बावजूद कांग्रेस नेता 2.40 पर आरओ के पास पहुंच गए थे। इसके फुटेज हैं। आरो ने ही उन्हें दूसरे कक्ष में भेजा और बाद में सिंबल लेने से मना कर दिया। जबकि 3 बजे से पहले पहुंचने पर अधिकारी को सिंबल लेने होते हैं। सरकार के दबाव में सिंबल नहीं लिए। इस रिपोर्ट में स्थानीय कांग्रेसी नेताओं की गुटबाजी का एंगल है। प्रदेश कमेटी शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। इस संबंध में पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा कि हमारे नेताओं को सहमति सुबह ही बना लेनी चाहिए थी। लेकिन इस प्रकरण में प्रशासनिक लापरवाही ज्यादा है। हमने रिपोर्ट दिल्ली भिजवा दी है। हाईकोर्ट में रिट, सुनवाई 7 को भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17‎ अधिकृत प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न‎ स्वीकार नहीं करने का मामला हाईकोर्ट, जोधपुर पहुंच‎ गया है। इस मामले में कांग्रेस प्रत्याशी‎ अर्चना दुबे व जितेंद्र दरयानी ने राज्य निर्वाचन आयोग ‎सहित अन्य के खिलाफ रिट‎ दायर की।‎ हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक ‎सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई 7 ‎सितंबर तय की।