जयपुर निगम के 150 वार्डों के लिए सोमवार को बीजेपी प्रत्याशियों ने नामांकन भर दिया है। अगर बीजेपी को बहुमत मिलता है तो बीजेपी के पास मेयर पद के लिए कई बड़े चेहरे हैं। लेकिन सामाजिक और जातिगत समीकरण के लिहाज से माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार जयपुर में वैश्य समाज से मेयर बना सकती है। ऐसे में सुनील कोठारी, पुनीत कर्नावट, विमल कटियार, विमल अग्रवाल और सुभाष सिंघी इस दौड़ में सबसे आगे नजर आते हैं। यह सभी वैश्य समाज से तो आते ही हैं, लेकिन पार्टी में भी किसी न किसी रूप में सक्रिय रहे हैं। इनको टिकट मिलने के साथ ही मेयर पद पर इनके नामों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इस बार नए चेहरों को मौका दिया है। जेन-जी को लुभाने के लिए कांग्रेस ने इस बार नई रणनीति बनाई है। कांग्रेस ने बोर्ड बनने की स्थिति में मेयर उम्मीदवार के तौर पर जेन-जी को आगे करने का विकल्प भी रखा है। वैश्य समाज से ही मेयर क्यों? दरअसल, बीजेपी का कोर वोटर ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत और सामान्य वर्ग को माना जाता है। जानकारों का मानना है कि पार्टी ने जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट से भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर ब्राह्मण कोटे को भर दिया है। वहीं, विद्याधर नगर सीट से दीया कुमारी को उप मुख्यमंत्री बना रखा है। वो राजपूत समाज से आती हैं। इसके साथ ही जयपुर की सांसद मंजू शर्मा भी ब्राह्मण हैं। ऐसे में पार्टी इस बार वैश्य समाज से मेयर बनाकर सामाजिक और जातिगत संतुलन को साधना चाहती है।वैश्य समाज से भी किसी महिला प्रत्याशी को जगह मिलना मुश्किल है। इसकी वजह है कि प्रदेश के 10 नगर निगमों में से मेयर की 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में पार्टी किसी पुरुष प्रत्याशी को ही जयपुर का मेयर बनाना चाहती है। सुनील कोठारी पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष पार्षद का चुनाव लड़ रहे बीजेपी के पार्षद प्रत्याशियों में मेयर पद का सबसे प्रबल दावेदार सुनील कोठारी को मानकर चला जा रहा है। सुनील कोठारी पेशे से ज्वेलर हैं। जयपुर की जेम्स एंड ज्वैलरी बिजनेस में उनका बड़ा नाम है। वे पार्टी में कार्यालय प्रभारी, प्रदेश मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रहे हैं। पार्टी के संगठन महामंत्री रहे, चंद्रशेखर का उन्हें सबसे करीबी माना जाता है। चंद्रशेखर के कार्यालय में ही वे पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। उनके जाने के बाद पार्टी में उनकी सक्रियता कम हुई थी। लेकिन निकाय चुनावों से पहले वे काफी सक्रिय देखे गए। पार्टी ने उन्हें निर्वतमान मेयर कुसुम यादव का टिकट काटकर उनके वार्ड-112 से प्रत्याशी बनाया है। इसके अलाना वो जैन समुदाय से आते हैं। पार्टी वैश्य में भी जैन को मौका देकर इस महत्वपूर्ण कम्युनिटी को साधना चाहती है। हालांकि उनकी बढ़ती उम्र उनकी राह में रुकावट भी पैदा कर सकती हैं। पुनीत कर्नावट डिप्टी मेयर भी मेयर की दौड़ में शामिल मेयर की दौड़ में दूसरा सबसे प्रबल दावेदार पुनीत कर्नावट को माना जा रहा है। कर्नावट निर्वतमान डिप्टी मेयर हैं। छात्र राजनीति से उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। एबीवीपी के कार्यकर्ता रहे हैं। प्रदेश युवा मोर्च में प्रदेश मंत्री भी रहे। फिलहाल उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नजदीकी माना जाता है। वे विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर सीट से दावेदारी भी जता रहे थे। लेकिन उस समय पार्टी ने कालीचरण सराफ को मौका दिया था। इस बार जिस तरह से पार्टी ने उनसे पहले कुलदीप मिश्रा को सिंबल जारी कर दिया और एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बाद उन्हें फिर से अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया। इसे लेकर मेयर पद पर उनकी दावेदारी पर लोग संशय भी कर रहे हैं। विमल कटियार विमल कटियार की वैश्य समाज में कितनी स्वीकार्यता मेयर पद के तीसरे दावेदार में विमल कटियार का नाम शामिल किया जा रहा है। वे बीजेपी में मीडिया प्रकोष्ठ के संयोजक रह चुके हैं। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के करीबी माने जाते हैं। आरएसएस के लघु उद्योग भारती प्रकोष्ठ में भी रहे हैं। पिछली बार उनकी भाभी पार्षद रही थीं। संगठन की पंसद भी हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके वैश्य समाज में स्वीकार्यता की है। दरअसल, विमल कटियार उत्तर प्रदेश से आते हैं। वहां कटियार वर्ग में उन्हें ओबीसी में शामिल किया गया है। ऐसे में जयपुर के माहेश्वरी, अग्रवाल, खंडेलवाल सहित पूरा वैश्य समाज में उनकी स्वीकार्यता बेहद जरूरी है। विमल अग्रवाल और सुभाष सिंघी भी दौड़ में इन तीन चेहरों के अलावा वार्ड-135 से प्रत्याशी विमल अग्रवाल भी मेयर पद के प्रबल दावेदारों में हैं। उनकी पहचान पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में मानी जाती है। पार्टी में जिला उपाध्यक्ष और दो बार के पार्षद हैं। युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि घनश्याम तिवाड़ी के साथ बीजेपी छोड़कर उनकी बनाई दीनदयाल वाहिनी पार्टी में चले गए थे। लेकिन फिर से बीजेपी मे लौट आए। इसी तरह से वार्ड 98 से प्रत्याशी सुभाष सिंघी भी मेयर पद के लिए चौंकाने वाला नाम हो सकता है। सिंघी आरएसएस के कार्यक्रमों में हमेशा प्रमुख सहयोगी रहे हैं। पूर्व मंत्री और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी के करीबी हैं। शहर के प्रमुख व्यवसायी भी हैं। वार्ड 98 से टिकट पाने वाले सुभाष सिंघी आर्थिक प्रकोष्ठ से जुड़े रहे हैं। समीकरण बिगड़े तो ज्योति खंडेलवाल पर भी दांव संभव कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुई ज्योति खंडेलवाल को पार्षद का टिकट देकर बीजेपी ने चौंकाया है। ज्योति खंडेलवाल जयपुर की पहली निर्वाचित मेयर रही हैं। कांग्रेस से जयपुर शहर लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। शहर की सियासत में जाना माना चेहरा हैं। वैश्य समाज से आती हैं। चारदीवारी और उससे जुड़ी सीटों पर विशेष प्रभाव रखती हैं। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होते समय उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन उन पर पार्टी तभी विचार कर सकती है, जब किसी अन्य आम पर आम सहमति और एक राय नहीं बन पाए। अगर वैश्य समाज के अलावा अन्य किसी पर विचार किया जाता है तो शैलेन्द्र भार्गव प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। शैलेन्द्र भार्गव ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। पार्टी में शहर बीजेपी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। लेकिन पार्टी ने उन्हें अभी तक कोई बड़ा पद नहीं दिया है। उन्हें टिकट मिलने के साथ मेयर पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। अब जानिए- कांग्रेस में कौन दावेदार… कांग्रेस जेन-जी नेता को बना सकती है मेयर उम्मीदवार कांग्रेस ने इस बार नए चेहरों को मौका दिया है। जेन-जी को लुभाने के लिए कांग्रेस ने इस बार नई रणनीति बनाई है। कांग्रेस ने बोर्ड बनने की स्थिति में मेयर उम्मीदवार के तौर पर जेन-जी को आगे करने का विकल्प भी रखा है। युवा ज्यादा जीतकर आए तो जेन-जी को मेयर बनाया जा सकता है। कांग्रेस में पहली बार पार्षद की टिकट वाले ज्यादा है। वरिष्ठ नेताओं की संख्या कम है। जयपुर मेयर उम्मीदवपार जेन-जी को बनाकर सियासी मैसेज दिया जा सकता है। कांग्रेस में सुनिता महावर, धर्सिंमह सिंघानिया सहित कई जताएंगे मेयर की दावेदारी कांग्रेस में मेयर के लिए कई दावेदार हैं। फिलहाल पार्टी वैट एंड वॉच की रणनीति पर है। कांग्रेस 150 में से कितनी जगह जीतती है, इस पर आगे की रणनीति टिकी हुई है। कांग्रेस में इस बार बड़े चेहरों को कम टिकट दिए हैं, इसलिए मेयर दावेदारों की उतनी भरमार नहीं है। पिछली बार मेयर की दावेदार रही सुनिता महावर इस बार भी दावेदारी करेंगी। नगर निगम में उपनेता प्रतिपक्ष रहे धर्मसिंह सिंघानिया भी दावेदारी जताएंगे। कांग्रेस नेता हरीश यादव की पुत्रवधू प्रियंका यादव को युवा चेहरे के तौर पर पार्षद का टिकट दिया है, सियासी परिवार से होने के कारण जीतने पर वे भी दावेदारी जताएंगी। अल्पसंख्यक समुदाय से वरिष्ठ पार्षद उमरदराज, पहली बार चुनाव लड़ रहे फारुख खान दावेदारी करेंगे। …. निकाय चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. सीएम के ओएसडी की पत्नी को मिला पार्षद का टिकट:जयपुर में भाजपा ने पूर्व मेयर कुसुम यादव का टिकट काटा, पढ़ें-10 नगर निगमों के प्रत्याशियों की लिस्ट 2. सीकर में कांग्रेस ने पति-पत्नी, ससुर-बहू को दिया टिकट:भाजपा ने पूर्व विधायक के पोते को उतारा, झुंझुनूं में BJP ने 19-वार्डों में नहीं उतारे प्रत्याशी 3. भीलवाड़ा में सिंबल को लेकर कांग्रेस-अफसरों में विवाद:जिलाध्यक्ष धरने पर बैठे, 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