अजमेर के किशनगढ़ में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज के चेहरे का निचला जबड़ा लगभग पूरी तरह चेहरे से अलग होकर जमीन पर गिर गया। उसे अजमेर के जेएलएन अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने जटिल ऑपरेशन कर जबड़े को दोबारा चेहरे से जोड़ दिया। डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर मरीज को सामान्य जीवन लौटाया। अस्पताल प्रशासन ने इसे अत्यंत दुर्लभ स्थिति बताते हुए सर्जरी को सफल बताया है। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज के इलाज में कई चुनौतियां थीं, लेकिन ऑपरेशन के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। अभी मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है। मरीज का एक्सीडेंट जन्माष्टमी(4 सितंबर) से 6 दिन पहले हुआ था, जबकि ऑपरेशन जन्माष्टमी के दिन हुआ था। जिसकी जानकारी डॉक्टर्स की टीम ने आज(गुरुवार) को दी है। सड़क हादसे में मरीज का जबड़ा हुआ अलग जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी निवासी करीब 28 वर्षीय मरीज को करीब 6 दिन पहले सड़क हादसे में गंभीर चोट लगी थी। हादसे में उसके निचले जबड़े पर इतनी गंभीर चोट लगी कि निचला जबड़ा लगभग पूरी तरह कटकर शरीर से अलग हो गया और जमीन पर गिर गया। परिजन जबड़े को उठाकर अपने साथ अस्पताल लेकर पहुंचे। ऐसी स्थिति में दांतों का सही मिलान बेहद जरूरी मुख्यमंत्री आयुष्य आरोग्य योजना(MAA) प्रभारी डॉ. अमित यादव ने बताया कि ऐसे मामलों में केवल जबड़े को वापस जोड़ना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि मरीज की नसों और रक्तसंचार को सुरक्षित रखना, रक्तसंचार बहाल करना, जबड़े को सही स्थिति में स्थापित करना तथा ऊपरी और निचले दांतों का सही मिलान करना भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जबड़ा अलग होने से सांस पर भी मंडराता खतरा डॉक्टर्स के मुताबिक, निचला जबड़ा केवल भोजन चबाने के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि यह जीभ को सामान्य स्थिति में बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब निचला जबड़ा पूरी तरह अलग हो जाए तो जीभ पीछे की ओर जाकर गले में जा सकती है, जिससे मरीज की सांस रुकने तक का खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण रहा कि मरीज को सुरक्षित तरीके से बेहोश करना और एनेस्थीसिया देना भी डॉक्टर्स के लिए बड़ी चुनौती थी। गले में छेद बनाकर दी गई एनेस्थीसिया, फिर शुरू हुआ ऑपरेशन जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि मरीज को सुरक्षित तरीके से बेहोश करने के लिए ईएनटी टीम ने डॉ. द्विविजय के नेतृत्व में गले में छेद बनाकर एयर-वे सुरक्षित किया, जिसके बाद एनेस्थीसिया देना संभव हो सका। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. दीपिका का विशेष सहयोग रहा। इसके बाद प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. नेपो विद्यार्थी और उनकी टीम ने अलग हो चुके निचले जबड़े को वापस उसकी मूल स्थिति में स्थापित करने की चुनौती स्वीकार की। चिकित्सकों ने जबड़े को सही स्थान पर सेट करने के साथ आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों से उसे मजबूती से जोड़ा। दांतों का मिलान था सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टर्स के अनुसार, इस प्रकार की चोट में ऑपरेशन की सफलता केवल जबड़ा जोड़ देने से तय नहीं होती। मरीज भविष्य में अपने दांतों से खाना चबा सके, इसके लिए ऊपरी और निचले दांतों का सही मिलान बेहद जरूरी होता है। चबाने के दौरान मुख्य रूप से निचला जबड़ा गति करता है। इसलिए अलग हो चुके जबड़े को सही स्थिति में लाकर चारों तरफ की मांसपेशियों और संबंधित ऊतकों से जोड़ना जरूरी था, ताकि मरीज आगे चलकर जबड़े को हिला सके और सामान्य रूप से भोजन चबा सके। -------------- जेएलएन हॉस्पिटल से संबंधित ये खबरें भी पढ़िए… जेएलएन-अस्पताल में 4 साल के मासूम की हुई जटिल सर्जरी:गर्म तेल से झुलसने के बाद प्राइवेट पार्ट के पास रास्ता हो गया था बंद अजमेर के जेएलएन अस्पताल के डॉक्टरों ने 4 वर्षीय मासूम की जटिल और दुर्लभ प्लास्टिक सर्जरी की। अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया, अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. अमित यादव और प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. नेपो विद्यार्थी ने गुरुवार को मामले की जानकारी संयुक्त रूप से दी। (पूरी खबर पढ़ें…) जन्म से दिल में छेद था,28 साल बाद पता चला:सांस फूलने से परेशान थी महिला, डॉक्टर बोले- देर होती तो ऑपरेशन संभव नहीं होता अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में एक महिला के दिल के छेद का सफल ऑपरेशन किया गया है। पुष्कर की 28 साल की महिला के जन्म से दिल में 1.79 सेंटीमीटर का छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट-एएसडी) था, लेकिन 28 साल बाद इसका पता चला। (पूरी खबर पढ़ें…)