करौली में मानसिक दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष जज बृजेश शर्मा ने दोषी पर 55 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने पीड़िता को मुआवजा योजना के तहत पांच लाख रुपए की सहायता राशि देने का भी आदेश दिया है। विशेष सरकारी वकील गजेंद्र शर्मा ने बताया कि इस मामले में सरकारी वकील ने 32 दस्तावेजी सबूत और 19 गवाह पेश किए थे। इन्हीं सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया और सजा सुनाई। यह मामला हिण्डौन सिटी के नई मंडी थाना क्षेत्र का है। पीड़िता के पिता ने 14 सितंबर 2025 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के पिता ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। उन्होंने 10 सितंबर 2025 को अपने घर की पेंटिंग का काम एक व्यक्ति को दिया था। 13 सितंबर 2025 को मानसिक दिव्यांग पीड़िता अपनी मां के साथ घर पर थी। उस समय उसके पिता ठेला लगाने के लिए बाहर गए हुए थे। पेंटिंग के पैसे लेने के बहाने आरोपी घर पहुंचा और 13 वर्षीय बालिका के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। पीड़िता के चिल्लाने पर आसपास के लोग वहां पहुंच गए। लोगों को आता देखकर आरोपी दीवार कूदकर मौके से भाग गया। घटना के बाद पीड़िता के पिता ने नई मंडी थाना हिण्डौन सिटी में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील की ओर से 32 दस्तावेजी सबूत और 19 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए गए। विशेष सरकारी वकील गजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि इन्हीं सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना।