कोटा में नगर निगम चुनाव को लेकर नामांकन वापसी के बाद शुक्रवार को निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए। रिटर्निंग अधिकारियों ने 100 वार्डों में मैदान में डटे 173 निर्दलीय प्रत्याशियों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह दिए। इनमें अलमारी, सेब, अंगूर, बिजली का खंभा, सिलाई मशीन, बांसुरी, गुब्बारा सहित कई तरह के सिंबल शामिल रहे। एडीएम विनोद मल्होत्रा ने बताया कि सभी 100 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए हैं। जिन वार्डों में दो या दो से ज्यादा प्रत्याशियों ने एक ही चुनाव चिन्ह की मांग की, वहां लॉटरी के माध्यम से फैसला किया गया। जिस प्रत्याशी के नाम लॉटरी निकली, उसे वही चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। इस प्रक्रिया के बाद सभी 173 निर्दलीय प्रत्याशियों को सिंबल दे दिए गए। टिकट नहीं मिलने पर पार्टियों से नाराजगी कलेक्ट्रेट पर चुनाव चिन्ह लेने पहुंचे कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा और कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की। प्रत्याशियों का कहना था कि उन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक जमीनी स्तर पर काम किया, लेकिन टिकट वितरण में उनकी मेहनत को नजरअंदाज कर दिया गया। कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे 15, 20 और 25 साल से पार्टी से जुड़े हुए हैं। टिकट नहीं मिलने के बाद अब उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है। वार्ड 100 के प्रत्याशी बोले- निर्दलीय बिगाड़ेंगे पूरा समीकरण वार्ड संख्या 100 से निर्दलीय प्रत्याशी सुशांत सिंह राठौड़ चुनाव चिन्ह गुब्बारा मिलने के बाद उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि इस बार निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव का पूरा समीकरण बिगाड़ेंगे। उनका दावा है कि किसी भी पार्टी को महापौर बनाने के लिए बहुमत नहीं मिलेगा और निर्दलीय प्रत्याशी ही महापौर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वार्ड में कचरा, रोड लाइट, आवारा पशु और पार्कों की समस्याएं प्रमुख हैं। जीतने के बाद इन समस्याओं के समाधान के लिए काम किया जाएगा। वार्ड 87 में राजकुमारी को मिली बांसुरी वार्ड संख्या 87 से निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमारी को बांसुरी चुनाव चिन्ह मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड से पहले जीतने वाले प्रत्याशी जनता के बीच नहीं आते थे और लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वह सिंधी समाज और वार्ड के लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान कराने के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं। अप्सरा बोलीं- पार्टी के लिए काम किया, फिर भी टिकट नहीं मिला निर्दलीय प्रत्याशी अप्सरा को अंगूर चुनाव चिन्ह मिला। उन्होंने कांग्रेस पर टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। अप्सरा ने कहा कि वह कई वर्षों से कांग्रेस से जुड़ी हैं और शांति धारीवाल की टीम में रहकर चुनाव, रैलियों और धरना-प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से काम करती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वह पार्टी के कार्यक्रमों में जयपुर और दिल्ली तक गईं, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और पार्टी के लिए जेल भी गईं। इसके बावजूद उनके वार्ड से 62 वर्षीय महिला को टिकट दिया गया। अप्सरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में गुटबाजी के कारण जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि टिकट वितरण के बाद उनके वार्ड में कांग्रेस का समीकरण बिगड़ चुका है और पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।