भीलवाड़ा | राजस्थान शिक्षा विभाग में सितंबर 2025 में 11,884 उप-प्राचार्यों की नियमित डीपीसी के बाद तय की गई वरिष्ठता को लेकर विवाद एक बार फिर अदालतों के बीच नया मोड़ लेता दिख रहा है। हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले के बाद उप-प्राचार्य अब उसी निर्णय के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दायर कराने और इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका के माध्यम से राज्य सरकार से प्रभावी पैरवी की मांग कर रहे हैं। उप-प्राचार्यों का कहना है कि सितंबर 2025 की डीपीसी उस समय लागू विभागीय नियमों के आधार पर हुई थी और वरिष्ठता निर्धारण में कार्यग्रहण तिथि को आधार बनाया गया था। उनका तर्क है कि शिक्षा विभाग में लंबे समय से वरिष्ठता के मामलों में नियमित सेवा और कार्यग्रहण को प्रमुख मानक माना जाता रहा है, इसलिए बाद में आधार बदलने से नियुक्ति प्रक्रिया में अस्थिरता पैदा होगी। उनका दावा है कि यदि मौजूदा आधार में बदलाव कर नए प्रावधानों को पिछली तिथि से लागू किया गया, तो इसका असर केवल उप-प्राचार्यों तक सीमित नहीं रहेगा।