पुलिस ने मोबाइल हैकिंग, फिशिंग लिंक और बॉटनेट मैलवेयर के बढ़ते खतरे से आम लोगों को बचाने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर क्राइम शाखा लगातार साइबर अपराधों की रोकथाम और जागरूकता अभियान चला रही है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि साइबर ठग फिशिंग लिंक का इस्तेमाल कर मोबाइल, कंप्यूटर और दूसरे डिजिटल डिवाइस में बॉटनेट मैलवेयर डाल सकते हैं। इसके बाद वे निजी जानकारी, मोबाइल एप्लीकेशन और बैंकिंग डिटेल तक पहुंच बना लेते हैं। वे यूजर की जानकारी के बिना नेट बैंकिंग से जुड़े यूजरनेम और पासवर्ड जैसी जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं। मोबाइल को वायरस फ्री बनाता है eScan CERT-In Bot Removal App उन्होंने बताया कि इस खतरे से बचने के लिए केंद्र सरकार के भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मिलकर एक एप बनाया है। यह eScan CERT-In Bot Removal App एंड्रॉयड यूजर्स के लिए है। यह एप मोबाइल में मौजूद खतरनाक बॉट, मैलवेयर, ट्रोजन और दूसरे साइबर खतरों को पहचान कर उन्हें हटाने में मदद करता है। यह एप मोबाइल में छिपे वायरस, जासूसी सॉफ्टवेयर, विज्ञापन सॉफ्टवेयर और बॉटनेट संक्रमण की जांच करता है और उन्हें हटाता है। यह मोबाइल एप्लीकेशन को दी गई संवेदनशील अनुमतियों पर भी नजर रखता है। इंटरनेट आधारित सुरक्षा के जरिए यह ऐप नए वायरस और साइबर खतरों को पहचानता है। अगर कोई खतरा मिलता है, तो यह संदिग्ध या खतरनाक एप को हटाने या अलग रखने की सुविधा भी देता है। eScan CERT-In Bot Removal App का इस्तेमाल ऐसे करें: साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर दें सूचना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि साइबर ठगों द्वारा इस प्रकार की ठगी का प्रयास किए जाने अथवा साइबर अपराध की घटना होने पर बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। साथ ही नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में शिकायत करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा साइबर हेल्पडेस्क नम्बर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है।