राजस्थान के 53,738 स्कूलों में बच्चों को खाना खिलाने के लिए बर्तन ही नहीं हैं। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार ने 595 करोड़ और प्रदेश सरकार ने 350 करोड़ (दोनों मिलाकर 955 करोड़) रुपए जारी कर दिए हैं। बर्तन और किचन उपकरण खरीद की पूरी प्रक्रिया पैसा ट्रांसफर करने के सिस्टम में बदलाव के कारण अटकी हुई है। इसके पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला...शिक्षा विभाग स्कूलों को पैसा देकर बर्तन खरीदने की अनुमति नहीं दे रहा। उसकी मंशा केंद्रीयकृत खरीद की है। दूसरा...एसएनए से एसएनए स्पर्श सिस्टम (इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट प्रणाली) बदलने से ट्रांसफर की प्रक्रिया में देरी हो रही है। केंद्र ने नवंबर 2025 में ही राशि जारी कर दी थी और 30 जून तक खरीद का लक्ष्य था। केंद्र ने मई में राजस्थान के पीएम पोषण कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान भी इस मुद्दे पर गंभीर नाराजगी जताई गई थी। प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड (PAB) की बैठक में सामने आया था कि 53,578 स्कूलों के लिए स्वीकृत किचन डिवाइस की खरीद लंबित थी। केंद्र ने राज्य को खरीद प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। देरी के लिए शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को जिम्मेदार बताया केंद्र के अधिकारियों के सामने राज्य के शिक्षा विभाग की ओर से देरी की वजह वित्त विभाग से समय पर राशि रिलीज नहीं होना बताई गई। बोर्ड की बैठक में राज्य प्रतिनिधि ने यह भी बताया कि वित्त विभाग ने एसएनए में समय पर फंड जारी नहीं किया, जिसके कारण केंद्र से तीसरी और चौथी किस्त की राशि के लिए प्रस्ताव तक नहीं भेजे जा सके। केंद्र ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए वित्त विभाग से समय पर राशि जारी कराने के लिए राज्य सरकार को पहल करने तक को कहा। मामला फिर केंद्र को भेजा गया है राज्य के पीएम पोषण के अधिकारियों का तर्क है कि राशि रोकने की स्थिति नहीं है, बल्कि एसएनए से एसएनए स्पर्श सिस्टम (इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट प्रणाली) में ट्रांसफर की प्रक्रिया के कारण वित्तीय लेन-देन में देरी हुई है। सिस्टम बदलने के दौरान भुगतान और फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब मामला दोबारा केंद्र सरकार के स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र से प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही राशि का प्रवाह सामान्य होने की उम्मीद है। उपकरण रिप्लेसमेंट की सूची तैयार, पांच साल पुराने बर्तन बदले जाएंगे इस बीच विभाग की ओर से स्कूलवार बर्तनों और किचन उपकरणों के रिप्लेसमेंट की सूची तैयार की गई है। इसमें 53,738 स्कूलों को शामिल किया गया है। पांच साल या उससे अधिक पुराने अथवा खराब हो चुके चूल्हे, पतीले, खाद्यान्न रखने के कंटेनर तथा खाना पकाने और परोसने के बर्तनों को बदला जाना है। हर स्कूल को 10 से 25 हजार रुपए 50 तक विद्यार्थियों वाले स्कूल को 10 हजार, 51 से 150 विद्यार्थियों पर 15 हजार, 151 से 250 पर 20 हजार और 251 या इससे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल को 25 हजार रुपए मिलेंगे। मॉनिटरिंग में भी राजस्थान पिछड़ा प्रदेश के 59% स्कूल ही एएमएस पर रोजाना डेटा रिपोर्ट कर रहे थे। विद्यार्थियों का आधार प्रमाणीकरण भी 79% था। केंद्र ने 2026-27 में 953.97 करोड़ के संसाधनों को मंजूरी दी है।