निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने अब ‘डैमेज कंट्रोल से बूथ मैनेजमेंट’ तक की रणनीति पर फोकस कर दिया है। टिकट वितरण के बाद कई जगह सामने आए विरोध, बगावत और नाराजगी के बीच भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष 4 सितंबर को जयपुर पहुंच रहे हैं। यह दौरा संगठन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बीएल संतोष यहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश कोर कमेटी के नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। बैठक का फोकस केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष को थामने और नाराज दावेदारों को पार्टी के साथ सक्रिय रखने पर भी रहेगा। इस दौरान यूजीसी रोल-बैक को लेकर सामान्य वर्ग के एक गुट की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन को लेकर भी चर्चा हो सकती है। भाजपा के सामने चुनौती.. अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी टिकटों की घोषणा के बाद भाजपा के सामने बड़ी चुनौती अब अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी है। कई शहर व कस्बों में टिकट नहीं मिलने से दावेदारों के समर्थकों में असंतोष है। कुछ जगह विरोध प्रदर्शन हुए हैं तो कई सीटों पर बागी मैदान में आ गए हैं। पार्टी नेतृत्व की चिंता यह है कि अंदरूनी नाराजगी वोटों के बिखराव में नहीं बदले। भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में बूथ मैनेजमेंट को चुनावी जीत की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। यही वजह है कि बीएल संतोष प्रदेश नेतृत्व से बूथ स्तर तक संगठन की वास्तविक स्थिति का फीडबैक लेंगे। बैठकों में यह देखा जाएगा कि किस वार्ड में पार्टी का बूथ नेटवर्क कितना सक्रिय है, कार्यकर्ताओं की टीम किस तरह काम कर रही है और किन इलाकों में संगठन को और मजबूत करने की जरूरत है। जहां बगावत ज्यादा, वहां अलग रणनीति बीएल संतोष के दौरे में उन सीटों पर विशेष चर्चा होगी, जहां भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के सामने पार्टी के ही नेता या समर्थक मैदान में हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर बातचीत, वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता और नाराज नेताओं को संगठन में भूमिका देकर समाप्त किया जाएगा। वॉर रूम से लेकर प्रचार रथ तक की समीक्षा: बीएल संतोष चुनावी वॉर रूम की कार्यप्रणाली पर भी फीडबैक ले सकते हैं। चुनाव प्रचार, प्रचार रथों की भूमिका, स्थानीय मुद्दों को लेकर पार्टी का अभियान और मतदाताओं तक सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा होगी। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के प्रयोग की पहली बड़ी परीक्षा ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ विजन के तहत निकाय चुनाव के बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में निकाय चुनाव भाजपा के लिए केवल स्थानीय सत्ता का चुनाव नहीं है। यह चुनाव संगठन की तैयारियों और अगले चरण के पंचायत चुनाव के लिए भी टेस्ट माना जा रहा है। निकाय चुनाव में संगठन की सक्रियता, बूथ मैनेजमेंट का असर आगे के चुनावों पर भी पड़ सकता है।