निकाय चुनाव-2026 में इस बार दो से अधिक संतान वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी हट गई है। इसका असर प्रत्याशियों की सूची में भी नजर आ रहा है। अलवर में भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने ऐसे 11 प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जिनके दो से लेकर सात तक बच्चे हैं। इसके अलावा कई वार्डों में अविवाहित प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में इस बार चुनाव में प्रत्याशियों की पारिवारिक स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सात बच्चों के पिता, 4 बच्चों की मां प्रत्याशी वार्ड नंबर 38 से कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे राहुल खान सात बच्चों के पिता हैं। वहीं वार्ड नंबर 4 से भाजपा प्रत्याशी कमला देवी के चार बच्चे हैं। वार्ड नंबर 7 से भाजपा प्रत्याशी सुमनलता के तीन बच्चे हैं। वार्ड नंबर 8 से भाजपा प्रत्याशी दीनदयाल के तीन बच्चे हैं, जबकि इसी वार्ड से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी के भी तीन बच्चे हैं। वार्ड नंबर 10 में भाजपा प्रत्याशी नीतू और कांग्रेस प्रत्याशी कविता, दोनों के तीन-तीन बच्चे हैं। इसी तरह वार्ड नंबर 14 में कांग्रेस प्रत्याशी हरिओम गुप्ता के चार बच्चे हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी रामानुज शर्मा के तीन बच्चे हैं। वार्ड नंबर 22 से कांग्रेस प्रत्याशी नंदलाल के तीन बच्चे हैं। वार्ड 3 से कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश सैनी के भी 3 बच्चे हैं। इसके अलावा चुनाव मैदान में कई ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिनके एक या दो बच्चे हैं। कई वार्डों में अविवाहित प्रत्याशी भी आमने-सामने इस बार निकाय चुनाव में कुछ वार्डों में अविवाहित प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। वार्ड नंबर 5 में पूर्व चेयरमैन मुकेश सारवान के अविवाहित भतीजे केशव सारवान (24) कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर भाजपा के मोहित चावरियां को चुनौती दे रहे हैं। युवा प्रत्याशी होने के कारण इस मुकाबले पर भी लोगों की नजर है। वार्ड नंबर 13 से भाजपा प्रत्याशी प्रकाश देवी शर्मा अविवाहित हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी शारदा शर्मा से है, जो दो बच्चों की मां हैं। वहीं वार्ड नंबर 19 में कांग्रेस प्रत्याशी राहुल सिंह अविवाहित हैं। राहुल के सामने भाजपा प्रत्याशी मनीष कुमार गुप्ता चुनाव मैदान में हैं, वे दो बच्चों के पिता हैं। पहले दो से अधिक संतान वाले नहीं लड़ सकते थे चुनाव निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशियों को लेकर लागू पात्रता संबंधी पाबंदी के कारण पहले ऐसे लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक रहती थी। इस बार नियम में बदलाव के बाद दो से अधिक बच्चों वाले लोग भी चुनाव मैदान में उतर सके हैं। इसका सीधा असर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची में दिखाई दे रहा है। हालांकि सभी वार्डों में ऐसा नहीं है। अधिकांश प्रत्याशियों के एक, दो या तीन बच्चे हैं, जबकि कुछ प्रत्याशी अविवाहित हैं। इस बार निकाय चुनाव में उम्र, राजनीतिक अनुभव और पार्टी की छवि के साथ प्रत्याशियों की पारिवारिक स्थिति भी अलग-अलग वार्डों में चर्चा का विषय बनी हुई है।