एक ही मजदूर 4 समितियों में हाजिर, पार्किंग कंपनी को 2.41 करोड़ तो ज्वैलर्स शॉप को 1.61 लाख भेजे राजगढ़ वन रेंज की सात ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समितियों में मजदूरी और विकास कार्यों के नाम पर हुई वित्तीय गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, भुगतान का पूरा तंत्र सवालों के घेरे में आता गया। भास्कर ने इन समितियों के दस साल के बैंक स्टेटमेंट खंगाले तो 80 ऐसे नाम सामने आए, जिन्हें अलग-अलग समिति में मजदूर दिखाकर वर्षों तक लाखों रुपए का भुगतान किया गया। 2019 से 2024 के बीच इन लोगों के खातों में करीब 9 करोड़ रुपए पहुंचने का रिकॉर्ड मिला है। विभागीय जांच में पहले 17 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था, जबकि बाद की जांच में वित्तीय गड़बड़ी का आंकड़ा करीब 21 करोड़ रुपए तक पहुंचा था। अब मामला हाईकोर्ट में भी है। जांच में भुगतान की चौंकाने वाली तस्वीर एक ही व्यक्ति को कई समितियों में मजदूर दिखाने से सामने आई। नरेश कुमार शर्मा को 2020 से 2024 के बीच कानेटी, सुरेर, मांचड़ी और बीगोता समितियों में मजदूर दर्शाकर 30.18 लाख रुपए का भुगतान किया गया। रामकेश मीणा को 2019 से 2024 तक 47.90 लाख, खिलूराम मीणा को 2019 से 2023 तक 37.20 लाख, राजेंद्र मीणा को 27.09 लाख और रामनिवास प्रजापत को 26.78 लाख रुपए दिए। जबकि अकुशल मजदूरी की दर 240 से 350 रुपए प्रतिदिन होती है। मजदूरों के बजट से पार्किंग कंपनी और ज्वैलर्स को रकम नियमों के मुताबिक स्थानीय अकुशल श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान होना था। इसके बावजूद समितियों के खातों से निजी फर्मों और कारोबारियों को रकम ट्रांसफर हुई। अनतपुरा, आमकीवाल और श्रीनगर समितियों से बीआर पार्किंग को कुल 2.41 करोड़ रुपए दिए गए। बीगोता से नीरजा बिल्डिंग मेटेरियल को 1.92 लाख और कानेटी से श्री दादाजी आभूषण को 1.61 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। कानेटी और सुरेर से ऐसे बाहरी परिवारों को भी भुगतान हुआ, जिनकी क्षेत्र में आबादी नहीं बताई गई है। माचड़ी समिति में एक दिन में 80 ट्रांजेक्शन तक किए : माचड़ी समिति के बैंक खाते में 4 मार्च 2024 को एक ही दिन 80 भुगतान और 23 अप्रैल को 53 भुगतान दर्ज मिले। सामान्य डीबीटी व्यवस्था में मजदूरी अलग तारीखों पर अलग रेफरेंस नंबर से चुकाई जाती है। इतनी बड़ी संख्या में एक दिन ट्रांजेक्शन भी संदिग्ध है। वहीं 1 करोड़ रुपए से अधिक के काम पर टेंडर जरूरी होने के बावजूद विभिन्न समितियों में करीब 14.37 करोड़ रुपए के काम बिना टेंडर कराए गए। बीगोता में 4.09 करोड़, श्रीनगर में 3.63 करोड़, अनतपुरा में 1.92 करोड़, कानेटी में 1.83 करोड़, मांचड़ी में 1.77 करोड़ और सुरेर में 1.13 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। पहले जांच में एसीबी की सिफारिश... फिर कमेटियां बनती रहीं : 7 फरवरी 2025 को तत्कालीन जांच अधिकारी सीसीएफ राजीव चतुर्वेदी ने गबन की पुष्टि करते हुए एसीबी जांच की सिफारिश की। 19 फरवरी 2026 को फाइल सीसीएफ आरके खैरवा को परीक्षण के लिए दी गई और 16 मार्च को चतुर्वेदी को हटा दिया गया। 30 मार्च की रिपोर्ट में एसीबी जांच की जरूरत नहीं बताई गई। 16 अप्रैल को एसीएस वन की बैठक में मामला एसीबी को भेजने का निर्णय हुआ, लेकिन अगले दिन नई कमेटी गठित कर दी गई। 4 मई को वरदा फाउंडेशन ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की। 19 जून की कमेटी ने 21 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी मानी। 1 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया। अब विभाग ने एसीबी जांच के लिए फाइल शासन को भेजने का प्रस्ताव तैयार किया है।