राजस्थान के इसबगोल की खरीद और प्रोसेसिंग से जुड़े किसान व उद्यमी गुजरात और राजस्थान में लागू GST की अलग-अलग दरों से परेशान हैं। गुजरात में प्राकृतिक, कच्चे और बिना प्रसंस्करण वाले इसबगोल बीज पर 0% GST का फैसला है, जबकि राजस्थान में मंडियों और गोदामों में रखे इसबगोल बीज पर 5% GST लगाया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि इस अंतर के चलते प्रदेश की मंडियों में इसबगोल की खरीद और नीलामी प्रभावित हो रही है। राजस्थान इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से 12 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली 57वीं GST काउंसिल की बैठक में यह मुद्दा उठाने की मांग की है। एसोसिएशन ने साथ ही प्राकृतिक और कच्चे इसबगोल बीज पर पूरे देश में एक समान 0% GST लागू करने की मांग की है। राजस्थान में देश के कुल इसबगोल उत्पादन का 75% से ज्यादा होता है, ऐसे में उद्योग और किसानों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। गुजरात-राजस्थान में अलग-अलग फैसलों से बढ़ी परेशानी एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप कुमार ने बताया कि गुजरात AAR के 29 मई 2026 के फैसले में प्राकृतिक, कच्चे और बिना प्रसंस्करण वाले इसबगोल बीज को ताजा मानते हुए शून्य GST लागू किया गया है। वहीं राजस्थान AAR के 27 जुलाई 2026 के आदेश में मंडियों और APMC में नीलामी के लिए आने वाले तथा गोदामों और शेड में रखे इसबगोल बीज को प्रोसेस्ड ड्राई मानकर 5% GST लगाया गया है। इससे राजस्थान की मंडियों में खरीद प्रभावित हो रही है। 90% इसबगोल निर्यात, GST रिफंड में फंस रही वर्किंग कैपिटल महासचिव विभोर गोयल ने कहा कि इसबगोल के बीज वातावरण से स्वाभाविक रूप से नमी ग्रहण करते हैं। मंडी या गोदाम में रखने से इसे सुखाया हुआ या प्रोसेस्ड नहीं माना जा सकता। राजस्थान से करीब 90% इसबगोल का निर्यात होता है। निर्यातकों को GST रिफंड मिलता है, लेकिन रिफंड में वर्किंग कैपिटल फंसने से प्रोसेसिंग इकाइयों का नकदी प्रवाह प्रभावित हो रहा है। पूरे देश में एक समान GST की मांग एसोसिएशन ने मांग की है कि APMC से खरीदे गए प्राकृतिक और कच्चे इसबगोल बीज पर पूरे देश में समान रूप से शून्य GST की सिफारिश की जाए। साथ ही GST काउंसिल की स्पष्टता आने तक राजस्थान GST विभाग AAR के विवादित फैसले को लागू न करे और मंडियों में इसबगोल की नीलामी व खरीद प्रक्रिया सामान्य कराई जाए। एसोसिएशन का कहना है कि राजस्थान में 5% GST जारी रहने पर प्रोसेसिंग इकाइयों के गुजरात जाने का खतरा है, जिससे मंडियों, परिवहन, भंडारण और रोजगार पर असर पड़ेगा।