नमस्कार, तेजल सुपर-डुपर पर एक बार फिर चीफ साहब का गमछा खूब घूमा। उन्होंने किस्सा भी सुनाया कि कैसे मास्टरी में नंबर आ गया था। प्रदेशभर से चुनावी रंग खूब सामने आ रहे हैं और हनुमान सेना हाईटेक प्रचार में जुट गई है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. तेजल सुपर-डुपर पर फिर घूमा 'गमछा' चुनावी माहौल में एक बार फिर चीफ साहब ने पब्लिक डिमांड पर गमछा घुमा गिया। जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय तेजा संवाद का कार्यक्रम था। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी और सांसद उम्मेदाराम समेत दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं। समाज की युवा प्रतिभाओं को इस मौके पर सम्मानित किया गया। इस दौरान जब तेजल सुपर डुपर गीत बजा तो चीफ साहब खुद को रोक नहीं पाए। किसी ने गमछा हाथ में थमा दिया। फिर क्या था। गमछा घुमा-घुमाकर चीफ साहब ने माहौल बना दिया। उम्मेदाराम और हेमाराम भी हाथ उठाकर डांस करने लगे। इस मौके पर चीफ साहब ने किस्सा भी सुनाया। बोले- मेरी पत्नी मास्टरनी बन गई थी। मेरे पिता भी टीचर थे। ऐसे में मैंने भी मास्टरी का फॉर्म भर दिया और मेरा नंबर आ गया। मुझे डूंगरपुर जिला मिला। फिर मैंने सोचा कि मेरी पत्नी यहां रहेगी और मैं डूंगरपुर रहूंगा। पिता भी बीमार रहते थे। ऐसे में मैंने मास्टरी करने का विचार छोड़ दिया। अगर मैं मास्टर बन गया होता तो बच्चों को अच्छा पढ़ाता, लेकिन तब आप मुझे यह मंच उपलब्ध नहीं कराते। 2. टिकट कटा तो आई आंसुओं की 'बाढ़' बारिश का मौसम है। चहुंओर बरसात हो रही है। कहीं-कहीं तो ग्लेशियर के पहाड़ टूट गए हैं। नदियों में उफान आ गया है। नेपाल में तो त्रासदी ही हो गई है। चुनावी सीजन भी बारिश की तरह होता है। हर तरफ चुनावी मेंढकों को शोर सुनाई देने लगता है। टिकट कटता है तो आंखों से गंगा-जमुना बहने लगती हैं। कहीं खुशी में नेताजी खूब गरजते हैं, कहीं दुखी होकर बिजलियां गिराने लगते हैं। निकाय चुनाव के सीजन में कई दृश्य देखने को मिल रहे हैं, जो चुनावी रंग को गाढ़ा कर रहे हैं। अजमेर की लक्ष्मी बुंदेल महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं। फिर भी टिकट कट गया। रोते-रोते वे कांग्रेस कार्यालय पहुंच गईं। इतने आंसू बहाए कि दफ्तर बाढ़ में बह जाने की नौबत आ गईं। लक्ष्मी देवी ने शहर जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल को श्राप जैसा दे दिया। बोलीं- मिलीभगत करके मेरा टिकट काटा है। इसकी शिकायत राहुल गांधी जी से करूंगी। जालोर की नीलम कुमारी नंगे पैर भागी जा रही थीं। वे सीधे निर्वाचन ऑफिस पहुंचीं। हांफते हुए बोलीं- मैंने अभी अभी नाम वापस ले लिया है, मैं चुनाव लड़ना चाहती हूं। निर्वाचन अधिकारी हैरान। मन ही मन सोचने लगे- मैडम ने पहले क्यों तो फॉर्म भरा? फिर क्यों नामांकन वापस ले लिया? और अब ऐसा क्या हो गया कि चुनाव लड़ने पर आमादा हैं। मैडम ने वीडियो बना रहे शख्स को धमकी दे दी। बोलीं - फोन तोड़कर फेंक दूंगी। उन्होंने स्पष्ट कारण नहीं बताया कि भागी-भागी क्यों आई हैं? बस ‘मर्द जात’ को भला-बुरा कहतीं रवाना हो गईं। पाली में वार्ड 1 से निर्दलीय पर्चा भरने वालीं लीला मगराज जैन रोते हुए नाम वापस लेने आईं। बोलीं- मुझ पर नाम वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। बीजेपी की ओर से धमकाया जा रहा है। इस पर बीजेपी जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी बोले- धमकाने का कोई सबूत है क्या? लोग अपनी मर्जी से फॉर्म भर रहे हैं। अपनी मर्जी से नाम वापस ले रहे हैं। बाड़मेर में तो अजब नजारा हुआ। RLP ने धर्माराम को टिकट दिया था। धर्माराम का मन डोल गया। वे नाम वापस लेने पहुंच गए। यह बात RLP पदाधिकारी जोगाराम को पता चली। जोगाराम ने एसडीएम ऑफिस पहुंचकर धर्माराम की गर्दन दबोच ली। अब बचाने वालों, पकड़ने वालों और पुलिस वालों के बीच रस्साकशी चलने लगी। जोगाराम ने खूब जोर लगाया। आखिर उनकी पकड़ से छूटकर धर्माराम सीधे दफ्तर के अंदर की ओर भागे। शोर उठा- दरवाजा बंद कर दो। बाहर निकलने के बाद उन्हें भाजपा का पटका पहना दिया गया। 3. चलते-चलते... उनका नाम हनुमान बेनीवाल है। वे वन मैन आर्मी हैं। हालांकि उनके पास आर्मी की कमी नहीं है। उनकी सेना में शामिल होने के लिए युवाओं में होड़ मचती है। वे युवाओं को अभयदान देते हैं। युवा अपनी गाड़ियों पर उनके पोस्टर लगाकर बिना टोल दिए निकल सकते हैं। वे विशेष आह्वान पर कूच में शामिल हो सकते हैं। इस दौरान वे गाड़ी की खिड़कियों में लटककर सफर कर सकते हैं। आरटीओ उनका बाल बांका नहीं कर सकता। उनका काम हनुमान बेनीवाल के आने पर उन्हें कंधों पर उठाकर पार्किंग से मंच तक पहुंचाना और उनके समर्थन में नारेबाजी करना है। हनुमान की इस सेना का खौफ इतना है कि कूच के आह्वान मात्र से प्रशासन दौड़कर आता है और कारों के बोनट पर मीटिंग कर मामले को रफा-दफा करा देता है। निकाय चुनाव के लिए उनकी सेना तैयार है। गलों में पीले गमछे डाल दिए गए हैं। हनुमानजी के साथ फोटो-सेशन हो चुका है। हनुमानजी चाय, नाश्ते, ड्राइफ्रूट, मेवा-पेठा और यहां तक कि भोजन के लिए सैनिकों से पूछा। सैनिकों को पेट-पूजा की परवाह नहीं। वे पीठ पर हाईटेक उपकरण बांधकर मैदान में कूद चुके हैं। अब मैदान में हनुमान ही हनुमान गूंजेगा। ये अलग बात है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद हनुमान के कुछ सैनी बागी होकर दूसरे दलों को पटका गले में डालकर ऊंचे पदों पर पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि 200 विधानसभाओ में न्याय योद्धा का एक भी सैनिक विधायक नहीं है। इनपुट सहयोग- भरत मूलचंदानी (अजमेर), भरत सांखला (जालोर), ओम टेलर (पाली), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।