नशा तो वैसे ही घातक है। अब इसे भी खतरनाक केमिकलों के जरिए नकली तैयार किया जा रहा है। भास्कर ने बाजारों में अवैध रूप से बिक रहे गांजे की प्रदेश की प्रयोगशाला में जांच कराई तो चौंकाने वाला सच सामने आया। कटी हुई सूखी पत्तियों, घास-भूस, चायपत्ती या छोटे पौधों की पत्तियों में अमोनिया, नाइट्रेट जैसे केमिकल मिलाकर नकली गांजा बनाया जा रहा है। यह लिवर, हार्ट, मस्तिष्क और फेफड़ों के लिए खतरनाक है। नकली गांजा बनाने में केमिकल का स्प्रे किया जाता है। नशे की क्षमता 30-50% तक बढ़ जाती है। चिंताजनक यह है कि ऐसे नशे से शरीर के कई अंग डैमेज होने का खतरा रहता है। लैब टेस्ट में खतरनाक केमिकल की पुष्टि हुई केमिकल एक्सपर्ट ने फास्ट ब्लू बी साल्ट टेस्ट किया। यह गांजे (कैनबिस/मारिजुआना) की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला संवेदनशील कलर टेस्ट है। लैब में पेट्रोलियम ईथर, फास्ट ब्लू साल्ट का पाउडर, सोडियम बाइ कार्बोनेट के जलीय घोल को सैंपल में मिलाया गया तो खुलासा हुआ कि गांजा नकली है। इसमें खतरनाक केमिकल की पुष्टि को लेकर नेक्सलर्स और स्पेक्ट्रो फोटो मीटर टेस्ट किए। अमोनिया व नाइट्रेट से इसे बनाए जाने का खुलासा हुआ। नशे से मौतों के मामले में राजस्थान तीसरे नंबर पर एएनसीबी के मुताबिक 2024 में नशे से देश में 978 मौतें हुईं। 2023 में देश में 650 मौतें दर्ज हुई थी। इन मौतों में राजस्थान तीसरे नंबर पर है। यहां सालाना 69 मौतें होती हैं। 106 मौतों के साथ पंजाब पहले नंबर पर है। ड्रग्स बेचने वालों के खिलाफ हम सख्ती कर रहे हैं। पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चला रहे हैं। एनडीपीएस के आरोपियों की प्रोपर्टी फ्रीज होनी चाहिए। -घनश्याम सोनी, क्षेत्रीय निदेशक, एनसीबी, जोधपुर एनडीपीएस एक्ट में पुलिस और एनसीबी संयुक्त रूप से नशा बेचने वालों की धरपकड़ लगातार की जा रही है। इसके अलावा नारकोटिक्स टीम के साथ मिलकर जन जागृति अभियान भी चला रहे हैं। -सत्येंद्र सिंह, आईजी, जोधपुर रेंज