फर्जी आधार से दो राशन डीलरों ने किया फर्जीवाड़ा राजस्थान में गरीबों के निवाले पर डाका डालने का संगीन और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जोधपुर के घंटाघर इलाके में एक ऐसे राशन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यहां एक व्यक्ति की मौत के बाद भी उसके नाम पर राशन का गेहूं लगातार उठाया जा रहा है। खेल सिर्फ राशन उठाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिना परिवार की सहमति के राशन कार्ड को दूसरी दुकानों पर ट्रांसफर (रसद विभाग की भाषा में बाईपास) करने का एक संगठित नेक्सस सामने आया है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जोधपुर के वार्ड नंबर 39 (घंटाघर) के निवासी सत्यनारायण के पिता दुर्गालाल शर्मा के नाम पर सरकार की अंत्योदय योजना के तहत राशन कार्ड (बारकोड संख्या: xxxxxx715781) जारी था। 13 जनवरी, 2023 को दुर्गालाल शर्मा का देहांत हो गया। उनकी मौत के बाद इस कार्ड से नाम कटना या उठान बंद होना चाहिए था। परिवार ने भी ईमानदारी दिखाते हुए इस कार्ड से गेहूं लेना बंद कर दिया। राशन डीलर और इस सिंडिकेट को लगा कि परिवार राशन नहीं उठा रहा है तो उन्होंने इस ‘लावारिस' पड़े कार्ड को कमाई का जरिया बना लिया। पहले दुकान संख्या 19481 से मृतक के नाम पर गेहूं उठे। फिर अचानक राशन कार्ड दूसरी दुकान नंबर 9550 को ट्रांसफर कर दिया। चौंकाने वाली बात ये है कि इसमें दुर्गालाल की बजाय किसी दूसरे व्यक्ति का फर्जी आधार कार्ड लगा दिया गया। वहां से भी गेहूं उठे, लेकिन मोबाइल नंबर बदलते तब तक मृतक के दिए गए मोबाइल नंबरों पर गेहूं उठने के मैसेज आ गए। तब दुर्गालाल के बेटे को पता चला कि पिता की मौत के बाद गेहूं उठ रहे हैं। इससे मामला खुल गया। सिस्टम पर उठे बड़े सवाल राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए पोस मशीन और आधार वेरिफिकेशन लागू किया था। जब मूल कार्डधारक दुनिया में नहीं है तो पोस मशीन पर किसका अंगूठा लग रहा था? राशन कार्ड ट्रांसफर करने के लिए उपभोक्ता का लिखित आवेदन और ओटीपी अनिवार्य होता है। बिना सत्यापन ये कैसे हुआ? सख्त कार्रवाई करेंगे : जोधपुर जिला रसद अधिकारी अंजुम ताहिर सम्मा ने बताया कि ऐसा मामला सामने आया है। हम इसकी जांच करा रहे हैं। ऐसा भी सामने आया है कि आधार किसी दूसरे का लिंक किया गया है। इसकी हर स्तर पर जांच करा रहे हैं। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।