नगरीय निकाय चुनाव भले ही सबसे छोटे चुनाव माने जाते हों, लेकिन इस बार झालावाड़ जिले में इनका मुकाबला बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। कांग्रेस में टिकट वितरण से लेकर वार्डों में प्रत्याशियों के प्रचार तक अंता विधायक व पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया का प्रभाव नजर आ रहा है। दूसरी ओर भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह का प्रभाव वाला यह क्षेत्र होने से पार्टी के चुनावी प्रबंधन में भी बड़े नेताओं की भूमिका दिखाई दे रही है। कांग्रेस के प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालयों में लगे पोस्टरों में भाया और कांग्रेस जिलाध्यक्ष के फोटो प्रमुखता से नजर आ रहे हैं। झालावाड़ नगरपरिषद के अलावा झालरापाटन, पीड़ावा, अकलेरा और मनोहरथाना निकायों में भी भाया गुट का प्रभाव टिकट वितरण में दिखाई दिया। खानपुर में जरूर विधायक सुरेश गुर्जर अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। अब खानपुर में कांग्रेस की पूरी चुनावी कमान भी गुर्जर के हाथ में है। झालावाड़ नगरपरिषद के 43 वार्डों में 112 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की शैक्षणिक योग्यता देखें तो 23 स्नातक हैं, जबकि 12 ने स्नातकोत्तर तक पढ़ाई की है। उच्च शिक्षा वाले प्रत्याशियों की संख्या के साथ कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। कई वार्डों में उच्च शिक्षित प्रत्याशी आमने-सामने हैं तो कुछ में कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है। टिकट वितरण में राजनीतिक समीकरणों के साथ प्रत्याशियों की शिक्षा को भी आधार बनाया गया, लेकिन उच्च शिक्षित चेहरों की संख्या अभी भी सीमित है। भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारी करीब एक महीने पहले ही शुरू कर दी थी। प्रत्याशियों के पैनल तैयार करने से लेकर स्थानीय स्तर पर रायशुमारी तक प्रक्रिया चली। पार्टी ने विधायकों को उनके क्षेत्र के निकाय जिताने की जिम्मेदारी दी है। मनोहरथाना विधायक गोविंद रानीपुरिया को अकलेरा और मनोहरथाना तथा डग विधायक कालूराम मेघवाल को डग और भवानीमंडी की जिम्मेदारी दी गई है। टिकट वितरण में पार्टी जिलाध्यक्ष और प्रदेश नेतृत्व की सहमति की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विधायकों की पसंद के प्रत्याशियों को टिकट मिलने की चर्चा भी चुनावी मैदान में है। सांसद दुष्यंत सिंह भी पिछले तीन दिन से जिले में रहकर चुनावी रणनीति और प्रत्याशियों के साथ संपर्क में जुटे हैं। झालावाड़ के एक वार्ड में भाजपा और एक में कांग्रेस प्रत्याशी निर्विरोध हैं। हालांकि एक वार्ड ऐसा भी है, जहां कांग्रेस प्रत्याशी मैदान से बाहर होने के बाद भाजपा के सामने अब आम आदमी पार्टी की चुनौती है। ऐसे में कुछ वार्डों में मुकाबला सीधे दो प्रमुख दलों के बीच है तो कुछ जगह चुनावी समीकरण बदल गए हैं।