पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बोले- 50 नए आइकोनिक डेस्टिनेशन विकसित किए जाएंगे पिछले दिनों जयपुर में पर्यटन और मध्य प्रदेश के भोपाल में संस्कृति पर ब्रिक्स देशों के पर्यटन और संस्कृति मंत्रियों की अलग-अलग बैठकों के दौर चले। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने साझा डिक्लेरेशन का खुलासा करते हुए भास्कर से बातचीत में कहा कि पहली बार पर्यटन को आउटकम से जोड़कर आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है। सीमलैस ट्रैवल और डेटा शेयरिंग पर रणनीति बनाना तय हुआ है। पर्यटन पर किन प्रमुख विषयों को लेकर सहमति बनी? पर्यटन में एआई इनेबलर के रूप में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर काम शुरू करेंगे। कोशिश कर रहे हैं कि एक देश से दूसरे देश में यात्रियों के लिए सीमलैस ट्रेवल हो। डेटा शेयरिंग यानी पर्यटन से जुड़ा डेटा एक-दूसरे देश के साथ किस तरह साझा किया जाए। इसमें पर्यटक कितने दिन रुकते हैं, कितना खर्च करते हैं, उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं, किस देश से कितने पर्यटक आते हैं... इस तरह के आंकड़े शामिल होंगे। अंततः बेहतर पॉलिसी प्लान करेंगे। पांडुलिपियों को डिजिटलाइज करने का क्या फायदा मिला? संस्कृति के स्पेक्ट्रम में देश की करीब एक करोड़ 22 लाख पांडुलिपियों को डिजिटलाइज किया गया है। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। पर्यटकों के भारत में अनुभव को लेकर फीडबैक? टूरिस्ट के लिए ओवरऑल एक्सपीरियंस महत्वपूर्ण होता है। एयरपोर्ट से लेकर होटल, रास्ते की टैक्सी सहित सभी सुविधाओं की दुविधाएं उसे खराब अनुभव देती हैं। इसलिए पर्यटन स्थल को केवल डेस्टिनेशन की खूबसूरती के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसलिए हम पूरी व्यवस्था को सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं। डेस्टिनेशन मैनेजमेंट की खामी कई जगह देखी जाती है, कैसे निपट रहे? एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एक सफल उदाहरण है। वहां डेस्टिनेशन मैनेजमेंट अथॉरिटी बनाई गई है। इसका कॉन्सेप्ट यह है कि उस पर्यटन स्थल की सफाई, सिक्योरिटी, सेफ्टी और अन्य व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी एक ही अथॉरिटी के एक अधिकारी की है। इसके अलावा सस्टनेबिलिटी पर हम बहुत काम कर रहे हैं। दुनिया के सभी पर्यटन स्थलों को सस्टेनेबल तरीके से विकसित करना जरूरी है। पर्यटन और संस्कृति में पिछले कुछ वर्षों के बड़े बदलाव क्या हैं? पर्यटकों के लिए। ई-वीजा व्यवस्था लागू की है। भारत में पर्यटन की बढ़ती मांग के मुकाबले हायर कैटेगरी के होटलों की कमी थी। हमने इसके लिए नीति बनाई और राज्यों के साथ साझा किया। केंद्र सरकार के स्तर पर हॉस्पिटेलिटी और टूरिज्म में निवेश को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया है। अब हम देश में 50 नए ग्लोबल स्टैंडर्ड के आइकोनिक डेस्टिनेशन विकसित करने जा रहे हैं।