सरकार ने पैच रिपेयर अभियान तेज कर दिया है। प्रदेश में चलाए जा रहे सड़कों की मरम्मत के पूर्व में स्वीकृत कामों में तेजी लाते हुए अब तक 53.7 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। सरकार ने शेष कार्य 5 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अभियान में खास तौर पर मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों और गड्ढों की पहचान कर तत्काल मरम्मत करने को कहा गया था। नियमित सर्वे और गश्त के जरिए गड्ढों को चिह्नित करने के बाद 48 से 72 घंटे के भीतर कोल्ड मिक्स या हॉट मिक्स से पैच रिपेयर किया जा रहा है। अभियान में कोटा और बीकानेर आगे: पैच रिपेयर अभियान में कोटा जोन सबसे आगे है। यहां स्वीकृत सभी काम पूरा करने का दावा किया गया है। बीकानेर जोन में शहरी क्षेत्र के 95 प्रतिशत, जयपुर-द्वितीय जोन के 91 प्रतिशत गड्ढों को भरा जा चुका है। बाकी जिलों के शहरी क्षेत्रों को एक सप्ताह का समय दिया गया है। डिजिटल निगरानी से ठेकेदारों की जवाबदेही पैच रिपेयर अभियान की सरकार डिजिटल निगरानी रख रही है। काम की निगरानी और सत्यापन के लिए ‘सुगम पथ पोर्टल’, जीपीएस फोटो और डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस व्यवस्था में गड्ढे की लोकेशन, मरम्मत से पहले और बाद की स्थिति तथा काम की प्रगति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है। इससे यह भी तय किया जा सकेगा कि किस स्थान पर कब मरम्मत हुई और काम की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी थी। डिजिटल निगरानी से जिम्मेदार ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय होगी। 387 करोड़ रुपए की मंजूरी, 175 करोड़ के काम पूरे प्रदेश में कुल 2 लाख 12 हजार 556 किमी का सड़क नेटवर्क है। इसमें राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण, राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सहित डीएलपी नेटवर्क के तहत आने वाली 86 हजार 254 किमी सड़कें शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, प्रदेश में 58 हजार 919 किमी सड़कें मरम्मत योग्य हैं, जबकि 55 हजार 340 किमी सड़कें पैचेबल हैं। इनके लिए अब तक 387 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। करीब 175 करोड़ रुपए के काम पूरे किए जा रहे हैं। नॉन-पैचेबल सड़कों के लिए 2055 नए काम स्वीकृत किए गए हैं।