इस वर्ष शिक्षक दिवस केवल कक्षाओं और मंचों पर शिक्षकों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मरुधरा की चौपालों से सामाजिक चेतना की क्रांति का गवाह बन गया। प्रदेश के 300 से अधिक गांवों में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने एक साथ हाथ उठाकर शिक्षक दिवस को नशा मुक्ति संवाद दिवस के रूप में मनाया। इस अभियान का सबसे बड़ा संदेश विवाह, सामाजिक समारोहों और बैठकों में नशे को मिलने वाली झूठी प्रतिष्ठा और सामाजिक स्वीकृति को हमेशा के लिए खत्म करना रहा। यह राज्यव्यापी आंदोलन राजकीय डूंगर महाविद्यालय के नई किरण नशा मुक्ति केंद्र के संयोजक और लोक संकल्प मुहिम के प्रणेता प्रो. श्यामसुंदर ज्याणी के नेतृत्व में धरातल पर उतरा। श्रीडूंगरगढ़ के बड़ा गांव में प्रो. ज्याणी, संस्था निदेशक मूलचंद गोदारा, सहायक आचार्य महावीर सिहाग के मार्गदर्शन में दो हजार विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने एक साथ कतारबद्ध होकर नशा मुक्त भारत की विशाल मानव आकृति उकेरी। प्रो. ज्याणी गांधी जयंती तक करेगे उपवास; अभियान को नैतिक ऊर्जा देने के लिए प्रो. श्यामसुंदर ज्याणी व उनकी पत्नी कविता ने 5 सितंबर से 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक सकारात्मक उपवास शुरू किया है। उन्होंने 21 सितंबर (रामदेव जयंती/तेजादशमी) व 28 सितंबर (भगत सिंह जयंती) को सामूहिक उपवास की अपील की।