शहर में बुधवार को चंदन षष्ठी यानी 'उब छठ' का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान के मंगल और मनोकामना पूरी होने की कामना से यह कठिन व्रत रखा है। 'उब छठ' की खासियत इसकी कठिन साधना है। 'उब' का मतलब है खड़े रहना। व्रत के दौरान महिलाएं न बैठती हैं, न सोती हैं और न ही पानी पीती हैं। वे चंद्रोदय तक खड़े रहकर या पैदल चलते हुए व्रत का पालन करती हैं। व्रती महिलाएं समूहों में पैदल चलकर मारवाड़ मूण्डवा के अलग-अलग मंदिरों में देवी-देवताओं के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस दौरान कथा व्यास पुराण पुरुषोत्तम व्यास चंदन षष्ठी की व्रत कथा सुना रहे हैं। कथा के जरिए व्रत की अहमियत, धार्मिक प्रसंगों और इससे जुड़ी लोक परंपराओं की जानकारी दी जा रही है। मारवाड़ इलाके में प्रचलित उब छठ का व्रत संयम, संकल्प और कठिन तपस्या का प्रतीक माना जाता है। दिनभर बिना कुछ खाए-पिए, बिना बैठे और बिना सोए रहना इस व्रत को खास बनाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रोदय होने तक मंदिरों के दर्शन करते हुए अपना समय धार्मिक आराधना में बिताती हैं। शाम ढलने के साथ ही महिलाओं की निगाहें चंद्रोदय पर टिकी रहेंगी। चंद्रमा के दर्शन होने पर विधि-विधान से अर्घ्य दिया जाएगा और परिवार के मंगल व खुशहाली की कामना की जाएगी। इसके बाद ही महिलाएं व्रत खोलेंगी। शहर में उब छठ के चलते मंदिरों में दिनभर धार्मिक माहौल बना हुआ है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी मारवाड़ मूण्डवा में महिलाओं की मजबूत आस्था, कठिन साधना और लोक संस्कृति को जिंदा रखे हुए है।