नगर विकास न्यास (यूआईटी) से साल 2004 में ट्रांसफर भूखंडों में फर्जीवाड़े के मामले में एसओजी ने मुख्य आरोपी विपिन कोठारी को गिरफ्तार किया। आरोपी पर खाली और निरस्त भूखंडों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर नगर निगम उदयपुर से फर्जी लीजडीड जारी करवाने और बाद में इन भूखंडों को बेचने का आरोप है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया- इस मामले में उदयपुर के थाना सूरजपोल में मामला संख्या 97/2022 दर्ज किया गया था। मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि आरोपी विपिन कोठारी ने सहआरोपियों विक्रम कुमार ताकड़िया, नितेश कोठारी, हेमलता कांकरिया, राकेश सोलंकी उर्फ बुक्का, निर्मल टेलर उर्फ गोपाल, भागीरथ गाडरी, दीपक कुमावत, दीपक सिंह चौहान और राजदीप सिंह के साथ मिलकर कई भूखंडों के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। नगर निगम अधिकारियों-कर्मचारियों से मिलीभगत का आरोप एसओजी की जांच के अनुसार- आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम उदयपुर के अधिकारियों और कर्मचारियों से कथित मिलीभगत कर भूखंडों की फर्जी लीजडीड जारी करवाई। इसके बाद इन भूखंडों के संबंध में अपने नाम पर मुख्तारनामाआम करवाकर दूसरे को बेच दी। लगातार तलाश के बाद पकड़ा गया आरोपी एसओजी के डीआईजी भुवन भूषण यादव के सुपरविजन और पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एसओजी यूनिट उदयपुर मुकेश कुमार सोनी की टीम आरोपी की लगातार तलाश कर रही थी। इसी दौरान विपिन कोठारी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को 15 सितंबर तक पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। आरोपी से मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, लीजडीड जारी करवाने और भूखंडों की बिक्री से जुड़े नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है। एसओजी के अनुसार मामले में अब तक फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूखंडों की लीजडीड जारी करवाकर उन्हें बेचने के आरोप में विपिन कोठारी समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों और फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।