भास्कर न्यूज | भरतपुर शहर में सफाई के नाम पर हर महीने नगर निगम सरकार के करीब डेढ़ करोड़ से अधिक खर्च कर रहा है, लेकिन सड़कों, कॉलोनियों और चौराहों से कचरा तक नहीं उठ रहा है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। इनके आसपास बेसहारा पशुओं और कुत्तों का जमावड़ा है। गंदगी से उठती दुर्गंध एवं संक्रमण के बीच से गुजरने वाले लोग नाक सिकोड़कर निकलने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, नगर निगम का सफाई अभियान भी जारी है। इन सभी की प्रभावी मॉनिटरिंग एजेंसियां तो काम कर ही रही हैं और निगरानी के लिए निगम के निरीक्षक व अभियंता तक तैनात हैं, फिर भी शहर में सफाई कहीं दिखाई नहीं दे रही है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि नगर निगम सफाई व्यवस्था पर औसतन हर महीने करीब 2 करोड़ मतलब सालाना 24 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। इसमें मैनपावर सप्लाई करने वाली सोन चिरैया फर्म को औसतन 53 लाख, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली वी-वायस फर्म को 80 लाख और ट्रैक्टर-ट्रॉली से कचरा परिवहन करने वाली राष्ट्रीय सामाजिक विकास संस्थान को करीब 20 लाख रुपए का प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा भी अन्य जगहों पर खर्च है लेकिन इन तीनों एजेंसियों को ही हर महीने करीब 1.53 करोड़ दिए जा रहे हैं। इनके अलावा भी निगम सफाई के नाम पर अन्य मदों में खर्च कर रहा है। फिर भी न कचरा नियमित उठ रहा है और न ही सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर आ रहा है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए निगम ने विशेष सफाई अभियान भी चला रखा है। निगम के रिकॉर्ड में अभियान की प्रगति रोज दर्ज हो रही है, लेकिन धरातल पर कई जगह कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। शहर के सारस चौराहे के पास, कन्नी गुर्जर चौराहे के पास, आरबीएम हॉस्पिटल के पास, हीरादास, कृष्णा नगर सहित अन्य कई स्थानों पर कचरे के ढेर पड़े हुए हैं। लोगों के अनुसार डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, ट्रैक्टर-ट्रॉली से कचरे का परिवहन और सफाई कर्मियों की तैनाती की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों के पास है। इन कामों की निगरानी के लिए निगम के निरीक्षक और अभियंता भी तैनात हैं। इसके बावजूद गंदगी बनी रहना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। प्रभावी मॉनिटरिंग का अभाव, इसलिए कचरे के ढेर:- शहर में कचरा उठाने और सफाई के काम का नियमित भौतिक सत्यापन नहीं हो रहा है। मॉनिटरिंग के अभाव में गली-मोहल्लों और चौराहों पर कचरों के डेर जमा हैं। इन सब के बीच निगम के पास सफाई अभियान की प्रगति का रिकॉर्ड तो है, लेकिन शहर की जमीनी स्थिति उस दावे से मेल नहीं खाती है। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार भरतपुर की रैंकिंग पर भी असर पड़ने की संभावना है। ^जेसीबी और डंपरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। पार्षद 20-20 कर्मचारियों की मांग कर रहे हैं, जबकि अभी 16-16 कर्मचारी दिए जा रहे हैं। कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। सफाई अभियान चल रहा है और व्यवस्था में और सुधार किया जाएगा। - श्रवण कुमार विश्नोई , आयुक्त, नगर निगम, भरतपुर