यह बॉलीवुड की किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है, जहां एक शातिर अपराधी दो दशकों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और अंत में साधु बने पुलिसवालों के जाल में फंस गया। गोवर्धन विलास थाना पुलिस ने साल 2004 में हाईवे पर कंटेनर लूटने वाले 10 हजार के इनामी बदमाश देवी सिंह कंजर को मध्य प्रदेश के चिड़ावद से गिरफ्तार कर 22 साल पुराने हिसाब को चुकता कर दिया है। आरोपी देवी सिंह इतना शातिर है कि गांव में पुलिस की वर्दी या गाड़ी का पहुंचते ही हवा हो जाता था। इस बार रणनीति बदली गई। पुलिस टीम साधु का भेष धरकर उसके गांव पहुंची। हाथों में कमंडल और भगवा चोला देख किसी को शक नहीं हुआ। गलियों में रेकी के दौरान टीम को गांव के ही एक पंडित से पुख्ता खबर मिली कि ‘शिकार’ घर के भीतर ही मौजूद है। पुलिस ने की घेराबंदी तो बाड़े में छिप गया, पर बच नहीं सका 10 अप्रैल को जैसे ही पुलिस ने उसके घर पर घेराबंदी की, देवी सिंह को भनक लग गई। वह भागकर घर के पीछे बने बाड़े में छिप गया। लेकिन साधु के भेष में पहुंची टीम ने फिल्मी स्टाइल में दबोच ही लिया। देवी सिंह पर राजस्थान और मध्यप्रदेश में डकैती, दंगे, चोरी और मारपीट के कई संगीन मामले दर्ज हैं। शुक्रवार देर रात पुलिस की विशेष टीम उसे लेकर उदयपुर पहुंची। गांव वाले बनते थे ढाल, महिलाओं ने रोकी थी राह 22 साल की लुका-छिपी में गांव के ही कुछ लोग देवी सिंह की ढाल बने हुए थे। पुलिस का कहना है कि उसे पकड़ने के लिए 15 से ज्यादा बार दबिश दी, लेकिन हर बार उसका मुखबिर तंत्र उसे बचा लेता। पिछले साल जब पुलिस पहुंची, तब घर की महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया और बच्चों को पुलिस जीप के आगे खड़ा कर दिया। इस ड्रामे का फायदा उठाकर देवी सिंह पीछे के रास्ते भाग निकला था। इस बार भेष बदला हुआ था और पुलिस पूरी तैयारी में थी। लड़कियों से छेड़छाड़ का आरोप लगाकर ड्राइवरों को पीटा और लूट ले गए कंटेनर 29 जुलाई, 2004 - सूरत से जयपुर जा रहे कंटेनर को उदयपुर जिले में पडुणा हाईवे पर बदमाशों ने रोका। लड़कियों से छेड़छाड़ का झूठा इल्जाम लगाकर चालकों को बेरहमी से पीटा गया। चालक रवींद्र, रामकिशन और खलासी रामजीत के हाथ-पैर बांधकर आंखों पर पट्टी चढ़ाई। फिर खेत में फेंक दिया गया। बदमाश पूरा कंटेनर लूट ले गए थे। इस केस में 5 आरोपी पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं, जबकि एक की मौत हो चुकी है। ये थे टीम में - इस कार्रवाई को प्रशिक्षु रामकुमार भादू के निर्देशन में अंजाम दिया गया। एएसआई मनोहर सिंह चौहान के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल नरेश कुमार, कांस्टेबल जसवंत सिंह और दिनेश कुमार शामिल थे।