सवाईमाधोपुर | जिला मुख्यालय की सीमेंट फैक्ट्री दि जयपुर उद्योग लिमिटेड के बंद होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मजदूरों को बकाया भुगतान मिलेगा। मजदूरों को फैक्ट्री प्रबंधन के आवास भी खाली करने होंगे। यह आदेश फैक्ट्री के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद के निपटारे के बाद आया है। फैसले का असर 1987 से बंद फैक्ट्री के 3535 मजदूरों पर पड़ेगा। इन्हें 5% ब्याज के साथ 115 करोड़ रुपए मिलेंगे। इसके छह माह बाद 1152 क्वार्टर खाली करने होंगे। नहीं खाली किए तो पेनल्टी रेंट लगेगा। स्थानीय मजदूरों ने इसे एकतरफा फैसला बताया। फैक्ट्री आवास में रह रहे परिवारों में विरोध के सुर भी उठे हैं। करीब 38 साल से बंद एशिया की नम्बर वन सीमेंट फैक्ट्री दि जयपुर उद्योग लिमिटेड पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को अहम फैसला दिया। इसके बाद मजदूरों के बकाया भुगतान की राह आसान हुई। आदेश के अनुसार मजदूरों का बकाया भुगतान 31 अगस्त 2026 तक मिल जाएगा। बकाया भुगतान के छह माह बाद मजदूरों को फैक्ट्री के आवास खाली करने होंगे। इसके बाद मजदूरों से आवासों का पेनल्टी रेंट वसूला जाएगा। पेनल्टी रेंट न्यायालय तय करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने श्रमिकों के कब्जे में मकान और प्लॉट को लेकर भी निर्देश दिए हैं। एरिया की पहचान होगी। रहने की जगह की पहचान होगी। किसे अलॉट किया गया था, यह देखा जाएगा। आवंटन की तिथि देखी जाएगी। अभी किसके पास रहने की जगह है, यह तय होगा। वहां रहने वाला ओरिजनल अलॉटी का फैमिली मेम्बर है या थर्ड पार्टी, यह भी जांच होगी। थर्ड पार्टी होने पर उसकी डिटेल ली जाएगी। कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य के अलावा किसी और के पास आवास होने पर उसकी क्षमता और स्थिति देखी जाएगी। उसे हक कैसे मिला, यह भी देखा जाएगा। आवास को लेकर गलत लेनदेन मिला तो मैनेजमेंट, कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य ने टाइटल या कब्जा तीसरे पक्ष को ट्रांसफर किया हो तो तीसरे पक्ष का कोई अधिकार नहीं होगा। प्रॉपर्टी वापस जयपुर उद्योग लिमिटेड को मिल जाएगी। प्रोसेस में छिपा हुआ लेनदेन मिला तो उस व्यक्ति पर क्रिमिनल एक्शन भी हो सकता है। ट्रांसफर के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार उस व्यक्ति को होगा, जिसने उसे अधिकार ट्रांसफर किए हैं। वर्ष 1948 में जयपुर के सवाई मानसिंह द्वितीय की पहल पर सवाई माधोपुर में एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री लगी थी। फैक्ट्री के लिए 365 एकड़ भूमि क्षेत्र लिया गया था। इसमें 60 एकड़ में प्लांट लगाया गया था। एक तरफा फैसले से मजदूर आहत, बना रहे रणनीति सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 3535 मजदूरों से जुड़ा है। सवाई माधोपुर में 752 और फलौदी में 400 क्वार्टरों में मजदूर परिवार रह रहे हैं। वर्ष 2006 में 115 करोड़ रुपए का पुनर्वास पैकेज भुगतान का आदेश था, इतनी ही रकम लेते तो तभी ले लेते, इस एक तरफा फैसले से मजदूर आहत हैं। औद्योगिक आवास कॉलोनी योजना में मजदूर परिवारों को आवास दिए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में तीन कंपनियों ने इस फैक्ट्री को चलाने और 2 हजार नए रोजगार देने के प्रस्ताव भी दिए हैं। आदेश में फैक्ट्री मालिक किसको बनाया है, यह स्पष्ट नहीं है? रिटायर जज भी 3 साल से यहां रह रहे परिवारों का सत्यापन कार्य करवा रहे हैं। - वीरेंद्र भाया , संयोजक, मजदूर संघर्ष समिति, सीमेंट फैक्ट्री, सवाई माधोपुर