राजस्थान में ब्रेस्ट कैंसर के रोजाना 41 मरीज, हर साल 6000 मौतें...कागजी स्क्रीनिंग और अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की बेहद कमी। यह सब भास्कर ने बताया। इस बीच इस दर्दनाक रोग के साथ हर रोज लड़ रही महिलाओं और उनके परिवारों की बात जरूरी है। कैंसर इनका सौंदर्य खा गया। इनकी पहचान को चुनौती दी। मगर महिला को शक्ति कहते हैं, यह शक्ति इनमें दिखती है। ये तीन किरदार ब्रेस्ट कैंसर से लड़ रही हर महिला का प्रतिनिधित्व करती हैं। ये लड़ रही हैं, मुस्कुरा रही हैं, जीत की ओर बढ़ रही हैं। खुद को संवारना नहीं भूलती... हाथोज की मनीषा को 3 साल पहले तीसरी स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर हुआ। परिवार रोने लगा, वो नहीं रोई। बेटा दीपक बताता है- मां खा नहीं पाती थी, उल्टी हो जाती थी, बुखार रहता था। आरयूएचएस बिल्डिंग के मेडिकल वार्ड में भर्ती है। 30 से ज्यादा कीमो हो चुके, दर्द चेहरे पर नहीं लाती। बाल झड़ चुके, शरीर कमजोर है... फिर भी शीशे में खुद को देखकर मुस्कुराना उसे अच्छा लगता है। सिर्फ बाल नहीं, आत्मविश्वास है हनुमानगढ़ की सिमरनजीत कौर को इसी साल ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। उसे अपने बाल बहुत प्यारे थे। कीमो से दर्द के साथ बाल झड़ने लगे। सिमरनजीत ने सिर मुंडाया, इस यकीन के साथ कैंसर से लड़ रही है कि एक दिन बाल फिर लौटेंगे, वो फिर अपने बाल संवारेगी। उसके पास विग है, सिर्फ इसलिए कि विग देखकर उनके मन में बीमारी को हराने की जिद जागती है। सिमरनजीत पूरे विश्वास के साथ कहती है- बाल उगेंगे, नहीं तो इस विग को पहन लूंगी...हेयर ट्रांसप्लांट भी करवा सकती हूं। मर्ज के दर्द को मोहब्बत का मरहम मिला हिंडौन सिटी की रेणु गुप्ता को अप्रैल 2025 में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। वो लेक्चरर है। पति योगेश नर्सिंग ऑफिसर हैं। रेणु बताती हैं- योगेशजी ने छुटि्टयां लेकर मेरी बहुत सेवा की, मालिश करते, कंघी करते, दवा देते, खाने-पीने का ख्याल रखते थे। मेरे बाल बहुत झड़ रहे थे, कंघी करने पर दर्द होता था। योगेशजी ने कहा- मैं इन्हें शेव कर देता हूं, नए बाल और सुंदर आएंगे। इलाज के दिनों में सेल्फी लेती थी। उन तस्वीरों का हमने एलबम बनाया। अब बाल आ गए हैं... योगेशजी ने सच ही कहा था।