शहर में विकास कार्य करवाने के लिए केडीए (कोटा विकास प्राधिकरण) ने एनसीआरपीबी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड) से 8% ब्याज दर लोन लिया। अफसर डेढ़ साल तक काम शुरू नहीं करवा पाए लेकिन लोन के पैसों से कमाई का रास्ता निकाल लिया। इसी जुलाई में केडीए ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 7.25% ब्याज दर पर 100 करोड़ रुपए की एफडी करवा दी। लोन की अपेक्षा एफडी पर ब्याज दर कम होने के कारण एक साल में केडीए को करीब 75 लाख रुपए का नुकसान होगा। इस एफडी को लेकर भास्कर ने पड़ताल की तो एक चौंकाने वाली यह बात सामने आई कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 7.30 प्रतिशत ब्याज पर एफडी का प्रस्ताव केडीए को दिया था लेकिन एसबीआई बैंक में 7.25 प्रतिशत ब्याज पर नॉन कोलेबल श्रेणी में एफडी करवा दी। नॉन कोलेबल यानी पैसा एक साल रखा जाएगा। दोनों बैंकों के ब्याज में 0.05% का अंतर है। केडीसी ने लिखा-एसबीआई का ब्याज ज्यादा भास्कर टीम ने इस पूरे मामले की नोटशीट खंगाली तो सामने आया कि इसी साल जुलाई में केडीए ने तय किया था कि दोबारा एफडी कराने से पहले अन्य बैंकों से ब्याज दर लेनी चाहिए। ब्याज दरें मिलने के बाद कैशियर ने बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कोलेबल और नॉन कोलेबल श्रेणी की दरों की तुलनात्मक टेबल नोटशीट पर बनाई। इसमें नॉन कोलेबल श्रेणी में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की दर 7.30% और एसबीआई की दर 7.25% का उल्लेख था। इसके बावजूद 7 जुलाई को नोटशीट पर केडीए आयुक्त (केडीसी) बचनेश अग्रवाल ने लिखा- एसबीआई हेविंग मैक्जिमम रेट ऑफ इंटरेस्ट। इसके बाद फाइल आगे बढ़ी और आदेश होने के बाद 8 जुलाई 2026 को एसबीआई में एफडी करा दी गई। हम पैसा प्रोजेक्ट्स के लिए देते हैं, एफडी कराने के लिए नहीं देते। जहां तक कोटा के प्रोजेक्ट्स का सवाल है, मैं एक बार हमारे यहां संबंधित अधिकारियों से बात करके सारी डिटेल लेता हूं। -जगमोहन सिंह दत्ता, चीफ रीजनल प्लानर, एनसीआरपीबी