सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे नौनिहालों के लिए अच्छी खबर है। उदयपुर के 2,921 सरकारी स्कूलों में से इस बार 850 स्कूलों में क्लासरूम की कमी दूर होने जा रही है। जिला प्रशासन ने पहले सुरक्षा, फिर शिक्षा की नीति के तहत डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड से इन चयनित स्कूलों में आवश्यकतानुसार दो से तीन अतिरिक्त क्लासरूम बनाने की मंजूरी दी है। इस बड़ी सौगात के बीच एक प्रशासनिक बदलाव भी किया गया है। निर्माण कार्य की नोडल एजेंसी समग्र शिक्षा अभियान ने स्टाफ के भारी संकट के चलते इस प्रोजेक्ट को संभालने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने बीच का रास्ता निकालते हुए अब इन नए कक्षा-कक्षों को तैयार करने की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत समितियों को सौंप दी है। इससे स्थानीय स्तर पर काम त्वरित गति से होगा और टेंडर की समस्या भी दूर होगी। 16 ब्लॉकों की मॉनिटरिंग के लिए महज 5 इंजीनियर समग्र शिक्षा विभाग के पास इस समय तकनीकी मैनपावर का टोटा है। जिले के 16 ब्लॉकों का कार्यभार संभालने के लिए विभाग के पास केवल एक एईएन और 4 जेईएन हैं। इतने कम स्टाफ के भरोसे 850 स्कूलों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांचना मुमकिन नहीं था। सूत्रों के अनुसार पूर्व में ऐसे ही कार्य स्वीकृत होने के बाद विभाग ने चार बार टेंडर जारी किए थे, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते किसी निर्माण एजेंसी ने रुचि नहीं दिखाई। डीएमएफटी की 2 बैठकों का गणित कोटड़ा में सबसे ज्यादा 65 स्कूलों में बनेंगे कमरे रफ्तार से होगा काम 11वीं बैठक के कुछ कार्य हमारे पास हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते हमने 12वीं बैठक के कार्यों के लिए असमर्थता जताई थी। अब ये 850 क्लासरूम पंचायत समितियों के माध्यम से त्वरित गति से बनाए जाएंगे, जिससे टेंडर की समस्या भी दूर होगी। कलेक्टर ने विशेष रुचि दिखाते हुए डीएमएफटी से यह बड़ा बजट शिक्षा के नाम किया है। -ननिहालसिंह चौहान, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा