सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती बाड़मेर शहर में शुक्रवार रात को ब्लैक आउट की मॉक ड्रिल की गई। अंधेरा होते ही एकदम सायरन बजा और हवाई हमले जैसी भीषण आपदा से निपटने के लिए मॉक ड्रिल एवं ब्लैक आउट का आयोजन किया गया। ब्लैकआउट के दौरान शहर में यातायात बंद रहा। मॉक ड्रिल का मुख्य केंद्र राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर रहा। धुएं के गुब्बार, एम्बुलेंस की आवाजें और राहत कर्मियों की भाग-दौड़ के बीच यह परखा गया कि यदि आसमान से मुसीबत बरसती है, तो हम कितने तैयार हैं। 8 बजते ही बजा सायरन, अंधेरे में दिखी नागरिक एकता शुक्रवार रात ठीक 8 बजते ही शहर की बिजली गुल हो गई। पूरा बाड़मेर 15 मिनट के लिए ब्लैक आउट की स्थिति में रहा। यह अंधेरा डरावना नहीं बल्कि नागरिकों के अनुशासन का परिचायक था। पूरे शहर में सड़कों पर सिर्फ वाहन दौड़ते नजर आए। ब्लैक आउट का मुख्य उद्देश्य हवाई हमले के दौरान दुश्मन के विमानों को शहर की लोकेशन और रोशनी के जरिए मिलने वाले लक्ष्यों से भ्रमित करना होता है। युद्ध से पहले नागरिकों को तैयार करना ही मॉक ड्रिल