पीबीएम अस्पताल की नई मेडिसिन विंग में मरीज की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। मरीज राधेश्याम को कागजों में बेड अलॉट कर दिया गया था, लेकिन भर्ती होने के बाद करीब 17 घंटे तक उसे अपना असली बेड नसीब नहीं हुआ। उसे बेड के पास ही अटेंडेंट (तीमारदार) के बेड पर लेटना पड़ा। बाद में स्थिति बिगड़ने पर आईसीयू में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। श्रीडूंगरगढ़ के पूनरासर निवासी राधेश्याम की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीसी घीया को सौंप दी गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, कागजों में मरीज को जी-21 नंबर बेड अलॉट किया गया था। क्लिनिकल आधार पर उसकी मृत्यु का प्राथमिक कारण वायरल और ड्रग रिएक्शन, माना गया है। परिजनों के मुताबिक, मरीज का बीपी काफी कम था और उसके सीने में तेज दर्द हुआ था। दैनिक भास्कर, के बुधवार के अंक में मामला प्रमुखता से उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसकी फैक्चुअल रिपोर्ट मांगी है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के आदेश पर अधीक्षक डॉ. घीया ने मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. परमेंद्र सिरोही, डॉ. रोहिताश्व कुलरिया, डॉ. मनोज माली और एक मेडिकल ज्यूरिस्ट की चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को तीन दिन में विस्तृत जांच कर फैक्चुअल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, अधीक्षक डॉ. घीया ने बुधवार को खुद नई मेडिसिन विंग का जायजा लेकर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। वहीं, श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने भी अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं पर भारी नाराजगी जताई है। मृतक के भाई विष्णु दत्त और तीमारदार मनोज सारस्वत ने अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर दोषी डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। नई मेडिसिन विंग में बेड की मारामारी को नियंत्रित करने के लिए एचओडी डॉ. परमेंद्र सिरोही ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें सभी यूनिट हेड्स को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया गया है। मेडिसिन विभाग में सीजनल डिजीज के समय मरीजों की भारी भीड़ रहती है। यह स्थायी आदेश हैं कि ऐसे समय में यदि किसी दूसरी यूनिट के बेड खाली हैं, तो वहां मरीज को सुलाया जाए। हम इमरजेंसी में अतिरिक्त बेड लगाने की व्यवस्था भी कर रहे हैं। मृतक मरीज को कागजों में बेड अलॉट किया गया था। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल