अजमेर की आकांक्षा चौधरी ने 18 जुलाई को मिसेज इंडिया 2026 का खिताब जीता। वह सात महीने के बेटे अर्शिव की मां हैं। आकांक्षा ने कहा- यह ताज सिर्फ उनकी जीत नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं की जीत है जो शादी और मां बनने के बाद अपने सपनों को अधूरा मान लेती हैं। जयपुर के होटल उनियारा में बातचीत के दौरान आकांक्षा चौधरी ने कहा- मिसेज इंडिया का ताज सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। मेरा उद्देश्य अब ऐसी महिलाओं तक पहुंचना है जो शादी या मां बनने के बाद अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। परिवार का सही साथ, आत्मविश्वास और मेहनत हो तो हर महिला अपनी अलग पहचान बना सकती है। पढ़िए आकांक्षा चौधरी से दैनिक भास्कर की खास बातचीत… सवाल: मिसेज इंडिया बनने के बाद जिंदगी में क्या बदलाव आने वाला है? आकांक्षा चौधरी: मैं पहले से एक कंटेंट क्रिएटर हूं और रोज लाखों लोगों से सोशल मीडिया के जरिए जुड़ती हूं। मेरे करीब चार से पांच लाख फॉलोअर्स हैं। लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि मुझे कोई ऐसा मंच मिले, जहां मैं हर वर्ग की महिलाओं तक अपनी बात पहुंचा सकूं। अक्सर शादी होने या मां बनने के बाद महिलाएं सोचने लगती हैं कि अब उन्हें सिर्फ परिवार ही संभालना है। कई महिलाएं अपना करियर, बिजनेस या अपनी क्रिएटिविटी पूरी तरह छोड़ देती हैं। मैं इसी सोच को बदलना चाहती हूं। इस मंच के जरिए मैं हर महिला को बताना चाहती हूं कि आप परिवार, बच्चे, करियर और अपने सपने सब कुछ एक साथ बखूबी संभाल सकती हैं। सवाल: आपका बेटा सिर्फ सात महीने का है। ऐसे में प्रतियोगिता की तैयारी करना कितना मुश्किल रहा? आकांक्षा: मुश्किल तो बहुत था, लेकिन मेरी मां पूरे समय मेरे साथ रहीं। अभी इस इंटरव्यू के दौरान भी वह मेरे बेटे को संभाल रही हैं। कई बार मेरी सासू मां भी (मदद के लिए) आ जाती थीं। सच कहूं तो उनके सहयोग के बिना यह सफर संभव ही नहीं था। रैंप वॉक की प्रैक्टिस, फोटोशूट और बाकी एक्टिविटीज के बीच मैं बार-बार जाकर बेटे को फीड (दूध पिलाना) करवाती थी और फिर वापस आकर तैयारी में जुट जाती थी। उसने अभी एक महीने पहले ही ऊपर का खाना शुरू किया है, इसलिए उसे मां की जरूरत ज्यादा रहती है। लेकिन मुझे लगता है कि यही सही समय है उसे यह सिखाने का कि उसकी मां की भी अपनी एक पहचान है और वह अपने सपनों को भी पूरा कर सकती है। सवाल: क्या आप शादी से पहले भी मॉडलिंग करती थीं? शादी और मां बनने के बाद वापसी करना कितना चुनौतीपूर्ण रहा? आकांक्षा: हां, जब मैं श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में पढ़ती थी और बाद में जब IIM अहमदाबाद में थी, तब करीब चार साल तक मैंने पढ़ाई के साथ-साथ मॉडलिंग की। बाद में जब नौकरी शुरू हुई, तो मॉडलिंग छूट गई। इसके बाद मैंने कंटेंट क्रिएशन शुरू किया, लेकिन मैं हमेशा मंच, रैंप और कैमरे की दुनिया को मिस करती थी। सबसे बड़ी और अच्छी बात यह रही कि मेरे पति ने ही मुझे दोबारा इस दुनिया में लौटने के लिए प्रेरित किया। मैं सोचती थी कि बच्चे के जन्म के बाद खुद को फिट और कॉन्फिडेंट बनाने में कम से कम दो साल लगेंगे। लेकिन उन्होंने कहा कि इंतजार क्यों करना? अभी से शुरुआत करो। उन्होंने मेरी डाइट, जिम, फिटनेस और हर छोटी-बड़ी चीज का खुद ध्यान रखा। उनकी वजह से ही मैं आज यहां तक पहुंच सकी हूं। सवाल: इसके लिए क्या परिवार को मनाना पड़ा या उन्होंने खुद आपका साथ दिया? आकांक्षा: मुझे किसी को मनाना नहीं पड़ा। पूरा परिवार शुरू से मेरे साथ खड़ा रहा। मैं एक पारंपरिक मारवाड़ी परिवार से आती हूं। जब मैंने 17-18 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की थी, तब भी मेरे माता-पिता ने मुझे कभी नहीं रोका। आज मुझे बेहद खुशी होती है कि हमारे समाज की कई लड़कियां मुझे देखकर मॉडलिंग और फैशन इंडस्ट्री में आने की हिम्मत जुटा पा रही हैं। सवाल: आज भी छोटे शहरों और गांवों में फैशन इंडस्ट्री को लेकर कई गलत धारणाएं हैं। ऐसी लड़कियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी? आकांक्षा: सबसे पहले तो सही जानकारी हासिल करें। यह सच है कि फैशन इंडस्ट्री को लेकर समाज में कई तरह की बातें होती हैं, लेकिन जरूरी यह है कि आप शुरुआत से ही किसी भरोसेमंद और प्रतिष्ठित एजेंसी के साथ काम करें। जैसे 'ग्लैमआनंद' जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियां सही प्रतिभा को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। इसलिए पहले अच्छी तरह रिसर्च करें। देखें कि अच्छे और क्रेडिबल लोग किन संस्थाओं के साथ जुड़े हैं और उसके बाद ही कोई फैसला लें। जब आपके पास सही जानकारी होगी, तो अपने माता-पिता, दादा-दादी और परिवार को समझाना भी बहुत आसान हो जाएगा। सवाल: अब आगे का क्या प्लान है? आकांक्षा: अब इस खिताब के साथ मुझे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। आगे कई फैशन शो, फोटोशूट, ब्रांड कोलैबोरेशन और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करना है। इसके साथ ही मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को यह विश्वास दिला सकूं कि शादी और मातृत्व (Motherhood) उनके सपनों का अंत नहीं, बल्कि एक खूबसूरत नई शुरुआत है।