अजमेर में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव को लेकर प्रशासन अलर्ट है। प्रशासन का दावा है कि बरसात के दौरान पहले तो जलभराव नहीं हो और अगर हो जाए तो पानी की निकासी तुरन्त हो जाए, इसके लिए पूरी तैयारी है। जिला कलेक्टर लोक बंधु ने बताया- इसके लिए संबंधित विभागों को जरूरी दिशा निर्देश दे दिए गए हैं और जरूरी उपाय भी किए गए हैं, ताकि आम लोगों को परेशानी नहीं हो। जलभराव होने पर तुरन्त मिलेगी राहत कलेक्टर ने कहा कि निश्चित तौर पर हमारा पूरा प्रयास है कि हम किसी भी क्षेत्र में जलभराव नहीं होने दें। अगर कहीं ज्यादा बारिश से जलभराव से होता है, तो हमारे जो रिसोर्सेज हैं, उनको ऐडीक्वेटली डिप्लॉय किया जाए। डी-सेंट्रलाइज्ड, उनका डिस्ट्रीब्यूशन हो, चाहे हमारे मड पंप्स हैं, चाहे जो भी हमारे रिसोर्सेज हैं, मैनपावर है। तुरंत उसको एक्टिवेट किया जाए और मड पंप्स को भी अलग-अलग जगह पर रखा जाएगा। ताकि जलभराव होने पर तुरन्त राहत दी जा सके। इसके अलावा जो भी बडे़ नाले है, उनकी सफाई की जा चुकी है। वरूण सागर में डी-सिल्टिंग शुरू कलेक्टर ने कहा कि वॉटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट के माध्यम से वरूण सागर में डी-सिल्टिंग का कार्य टेक अप किया गया है। अन्य भी वॉटर बॉडीज में प्रस्तावित है, जिसमें साइंटिफिक तरीके से किस प्रकार से इरिगेशन डिपार्टमेंट इसको करवा सकते हैं, उसको ध्यान में रखते हुए इसको टेक अप किया जा रहा है ताकि जो भी सिल्ट जमा हुई है या जो कचरा है, उसको निकाला जाए और कैपेसिटी किस तरह से एनहांस हो सकती है। विदाउट डिस्टर्बिंग द इकोलॉजिकल बैलेंस ऑफ द लेक उसको ध्यान में रखते हुए ये कार्य टेक अप किया गया है, तो निश्चित तौर पर इसका भी फायदा मिलेगा। मरम्मत व अतिक्रमण हटाने के निर्देश कलेक्टर लोक बंधु ने कहा कि शहर के आसपास जितने तालाब हैं या जितने वॉटर बॉडीज हैं, उनके रिपेयर के लिए भी सिंचाई विभाग को और अगर ग्रामीण क्षेत्र में है तो संबंधित बीडीओ को, शहरी क्षेत्र में कमिश्नर को निर्देश दिए हैं। सभी उपखंड अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि कहीं भी अगर जलभराव के क्षेत्रों में कोई अतिक्रमण वगैरह है, उसको चिन्हित करके उस पर कार्रवाई करें। 10 साल का रिकॉर्ड : देर से आया मानसून, लेकिन हर बार एक जैसा नहीं रहा ट्रेंड पिछले दस साल के रिकॉर्ड के अनुसार- मानसून की देरी और जल्दी आने का असर बारिश पर जरूर पड़ता है, लेकिन हर बार परिणाम एक जैसे नहीं रहे। साल 2018 में सामान्य से 2 प्रतिशत कम बारिश हुई और इसे कमजोर मानसून माना गया। 2019 में मानसून के सक्रिय होने के बाद जिले में 67 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई। सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 2025 में बना, जब पूरे मानसून में 878 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 92 प्रतिशत अधिक थी। इसके पहले 2024 में 819.6 मिमी बारिश हुई थी, जो सामान्य से 79 प्रतिशत ज्यादा रही। यानी पिछले दो सालों ने जिले की बारिश का पूरा रिकॉर्ड बदल दिया। साल 2025 में हुए हालात को इन फोटोज में देखिए….