अजमेर में बुजुर्ग के घुटनों का दर्द ठीक करने के नाम पर 4.39 लाख रुपए ठग लिए गए। आरोपियों ने बुजुर्ग को दर्द से निजात दिलाने के लिए एक डॉक्टर का एड्रेस दिया, जो उनका ही साथी था। इसके बाद फर्जी इलाज कर रुपए लेकर भाग गए। अब फर्जी डॉक्टर समेत तीन आरोपियों को भोपाल से पकड़ा गया है। सभी बुजुर्गों और शारीरिक दर्द से परेशान लोगों को अपना निशाना बनाकर रुपए ऐंठते थे। मामला कोतवाली थाना इलाके का है। बारां और कोटा के रहने वाले है आरोपी ​एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि मामले में ​दीन मोहम्मद (38), मोहम्मद कादिर (28) दोनों निवासी अंता, जिला बारां और मोहम्मद आसिफ (35) निवासी विज्ञान नगर, जिला कोटा को गिरफ्तार किया गया है। इसमें मोहम्मद कादिर डॉ. समीर जरीवाला नाम का फर्जी डॉक्टर बनता था। दर्द के इलाज के नाम पर फंसाया एसपी ने बताया कि हरीराम किशनचन्द मूलचन्दानी (62) ने ठगी का मामला दर्ज करवाया था। रिपोर्ट में बताया था कि उनके घुटनों में दर्द रहता है। 26 मार्च को एक व्यक्ति मिला था। उसने कहा कि उसकी मां को भी ये समस्या थी। डॉ. समीर जरीवाला के इलाज से वह बिल्कुल ठीक हो गई। उसके कहने पर डॉक्टर को अपने घर बुलाया। डॉक्टर ने घुटने से 'सिंघी' (एक कुप्पीनुमा उपकरण) के जरिए मवाद निकालने का नाटक किया। कुल 73 बार मवाद निकालने का दावा कर उससे 4 लाख 39 हजार रुपए वसूल लिए। इसके बाद फरार हो गए। ​500 फुटेज से लोकेशन ट्रेस कर पकड़ा एएसपी हिमांशु जांगिड़ और डिप्टी शिवम जोशी के निर्देशन में कोतवाली थानाधिकारी अनिल देव की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने अभय कमांड सेंटर और निजी इमारतों में लगे 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर गिरोह की ओर से इस्तेमाल की गई लाल रंग की स्विफ्ट कार को ट्रेस किया गया। इसके बाद भोपाल (मध्य प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया। तीनों आरोपी एक अन्य वारदात की फिराक में थे। आरोपियों के पास से ठगी के 33,800 रुपये नकद, इलाज में प्रयुक्त उपकरण, दवाइयां, स्प्रे, 12 मोबाइल फोन (6 एंड्रॉइड व 6 की-पैड) और 9 सिम कार्ड जब्त किए हैं। अमीर बुजुर्गों को ठगते थे आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गिरोह के सदस्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ियों पर रेडियम टेप लगाने के बहाने घूमते थे। इस दौरान वे ऐसे संपन्न बुजुर्गों की तलाश करते थे, जो चलने में लाचार दिखें। पहचान होने पर गिरोह का एक सदस्य 'मददगार' बनकर उनसे संपर्क करता और फिर फर्जी डॉक्टर के पास भेजकर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। वारदात के बाद वे सिम कार्ड नष्ट कर शहर छोड़ देते थे।