अजमेर में शहरवासियों और पर्यटकों को लेपर्ड सफारी प्रोजेक्ट की सौगात 6 महीने में मिल सकेगी। काजीपुरा स्थित गंगा भैरव घाटी में लेपर्ड सफारी प्रोजेक्ट बन रहा है। भैरव घाटी में अभी करीब 10 लेपर्ड हैं। वहीं यहां मौजूद लेपर्ड के लिए हिरण भी छोडे़ जाएंगे। इसके लिए वन विभाग को बरसात का इंतजार है। इसके अलावा नील गाय, फॉक्स, जैकाल, मोर और अन्य पक्षी हैं। इसके लिए करीब 3 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। अब यहां मेन गेट, चारदीवारी बनाने के अलावा 8 किलोमीटर का ट्रैक, टिकट विंडो, वॉच टावर आदि का काम चल रहा है। इसके अलावा पर्यटक यहां ऐतिहासिक पृथ्वीराज पोल भी देख सकेंगे। 3 साल पहले संरक्षित किया था घाटी को उप वन संरक्षक पी.बालामुरुगन ने बताया- अरावली की पहाड़ी के बीच गंगा भैरव घाटी को साल 2023 में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया था। सरकार ने बजट घोषणा के अनुरूप तीन करोड़ रुपए स्वीकृत किए। इससे यहां प्रवेशद्वार, बुकिंग विंडो कक्ष, करीब 8 किमी का सफारी ट्रैक, बाउंड्री वॉल, पार्किंग, 4 हेक्टेयर का प्रे-बेस, वन चौकी, वाटर पॉइंट्स, फूड कोर्ट, टूरिस्ट रेस्ट हाउस, टॉयलेट्स सहित अन्य निर्माण कार्य जारी हैं। 40 किलोमीटर का है भैरव घाटी क्षेत्र पी.बालामुरुगन ने बताया- भैरव घाटी का एरिया करीब 40 किलोमीटर का है। यहां करीब 10 लेपर्ड हैं और इसके अलावा नील गाय, फॉक्स, जैकल, मोर व अन्य पक्षी है। यहां अभी हिरण नहीं हैं, इसलिए लैपर्ड के लिए बरसात होते ही हिरण छोडे़ जाएंगे। ये हिरण पुष्कर से लाए जाएंगे। इस साल दिसंबर या जनवरी तक इसे शुरू करने की योजना है। सफारी से बढ़ेंगे पर्यटक लेपर्ड सफारी बनने के बाद अजमेर में सैलानियों का ठहराव बढ़ेगा। अब तक यहां आने वाले सैलानी अजमेर दरगाह और पुष्कर तीर्थ दर्शनों के लिए 1-2 दिन ही रुकते हैं। लेपर्ड सफारी बनने के बाद यह ठहराव कम से कम तीन दिन का होगा। वन विभाग को उम्मीद है कि सफारी के प्रति सैलानियों को विशेष आकर्षण है। ऐसे में सैलानियों की संख्या बढ़ने के साथ ठहराव भी बढ़ेगा। पृथ्वीराज पोल पर जा सकेंगे पर्यटक उप वन संरक्षक पी.बालामुरुगन ने बताया- यहां घास के मैदान तैयार किए जाएंगे। वर्तमान में बनाई सड़क को इस बरसात में देखेंगे और अगर कहीं बरसात से सड़क टूटी तो वहां सीमेंटेंड सड़क बनाई जाएगी। इसके अलावा यहां एक ऐतिहासिक पृथ्वीराज पोल भी है। यहां जाने के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं है। पर्यटक यहां भी जा सकें, इसलिए अगले फेज में यहां का रास्ता बनाकर, अन्य उपाय किए जाएंगे।