अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) पर खातेदारी और चरागाह भूमि पर अतिक्रमण करने, सवाईपुरा-​​सूरजकुंड की सीमा तय करने वाले पुराने सीमा पत्थर को (मठानों) हटाने का आरोप लगाया है। एडीए की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और कलेक्ट्रेट पर जमकर प्रदर्शन किया। पीसांगन के पूर्व प्रधान अशोक सिंह रावत और भगवानपुरा सरपंच मानसिंह के नेतृत्व में सवाईपुरा, सूरजकुंड और मोतीसर के ग्रामीण व महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने, दोबारा पैमाइश कराने और सीमा पत्थर यथा स्थान स्थापित कराने की मांग की। सरकारी जमीन पर फार्म हाउस प्रदर्शन के दौरान पूर्व प्रधान अशोक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि 2013-14 से ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि पिछले दो सालों से पुष्कर क्षेत्र के आसपास एडीए मनमाने तरीके से खातेदारी भूमि, कुओं और चरागाह क्षेत्र में दखल दे रहा है। साथ ही सरकारी भूमि पर फार्म हाउस और रिसॉर्ट विकसित किए जा रहे हैं। 8 से 10 पुराने मठानों को जेसीबी से हटाया उन्होंने आरोप लगाया कि सूरजकुंड और सवाईपुरा के बीच सीमा तय करने वाले 8 से 10 पुराने मठानों को जेसीबी से हटाकर दबा दिया गया, जिससे राजस्व सीमा पर विवाद की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ग्राम सूरजकुंड में होटल और आवासीय योजना के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड की अनदेखी करते हुए सवाईपुरा की सीमा में करीब 100 मीटर तक रास्ता निर्माण, मिट्टी उत्खनन और अन्य कार्य किए जा रहे हैं। दोबारा सीमांकन की मांग उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और एडीए की संयुक्त टीम खातेदारों की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन कराए, हटाए गए सीमा पत्थर पुनः स्थापित करे और जांच पूरी होने तक सभी निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद कराए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।