अमृतकौर अस्पताल में व्यवस्थाओं की हकीकत चौंकाने वाली है। मदर-चाइल्ड विंग के तीसरे फ्लोर पर 2017 में बनी लाइब्रेरी पिछले 8 साल से बंद पड़ी है। कमरे में रखा फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां और अलमारियां धूल और जालों से ढकी हुई हैं। कई सामान से अब तक कवर तक नहीं हटाया गया है। करीब एक लाख रुपए का यह सामान उपयोग के अभाव में धीरे-धीरे खराब हो रहा है। अस्पताल में रोजाना आसपास के मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं और विभिन्न जिलों से प्रशिक्षणार्थी डॉक्टर आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे इस लाइब्रेरी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। मदर-चाइल्ड विंग के कई कर्मचारियों को भी इस सुविधा की जानकारी नहीं है जिससे इसका लाभ पूरी तरह शून्य बना हुआ है। इसके बावजूद पीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि एमसीएच विंग में लाइब्रेरी सुविधा उपलब्ध है और स्टाफ इसका उपयोग कर सकता है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव : अस्पताल में मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव नजर आता है। मुख्य भवन में पर्ची काउंटर के पास बैठने की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। इमरजेंसी में परिजनों के लिए केवल दो बैंच हैं, जिससे कई लोगों को बाहर या फर्श पर बैठना पड़ता है। मंजू शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को बच्चे के इलाज के लिए आने पर उन्हें जमीन पर बैठना पड़ा। वहीं जस्सा खेड़ा निवासी शंकर नाथ ने भी ऐसी ही स्थिति बताई। कुर्सियों पर जमी मिट्‌टी।