भास्कर न्यूज | ब्यावर अमृतकौर अस्पताल (एकेएच) के आंकड़े शहर की सड़कों पर दौड़ती मौत की गवाही दे रहे हैं। इस साल अब तक सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर 190 लोग अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 4 लोगों की जान चली गई। हादसों का सबसे बड़ा शिकार 'युवा वर्ग' हो रहा है। रफ़्तार, शराब और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण घर के चिराग बुझ रहे हैं। बीते दो सप्ताह की बात करें तो करीब 60 मरीज घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचे। इनमें साल 3 गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। यानी हर दिन औसतन 4 से 5 लोग सड़कों पर लहूलुहान हो रहे हैं। अधिकांश हादसे शराब पीकर वाहन चलाने, बिना हेलमेट और तेज गति के कारण हुए हैं। बदलते मौसम में भी विजिबिलिटी और लापरवाही ने दुर्घटनाएं बढ़ाई हैं। यातायात प्रभारी उप निरीक्षक पूनमचंद विश्नोई के अनुसार, पुलिस लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही है। पाबंद भी कर रही है। अस्पताल में उपचाररत मरीज (फाइल फोटो) पीएमओ डॉ. सुरेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार अमृतकौर अस्पताल में दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था समय के अनुसार दो हिस्सों में बंटी है। सुबह 3 बजे से पहले 15 नंबर कमरा और 3 बजे के बाद में इमरजेन्सी वार्ड में सारी व्यवस्था कर रखी है। {युवा वर्ग ध्यान दें: आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा घायल युवा हो रहे हैं, स्टंट और रफ़्तार से बचें। शराब से तौबा: नशे में वाहन चलाना खुद और दूसरों की जान को खतरे में डालना है। गोल्डन ऑवर: दुर्घटना के पहले एक घंटे (गोल्डन ऑवर) में अस्पताल पहुंचना जान बचा सकता है, तत्काल 108 या नजदीकी पुलिस को सूचना दें।