बूसी गांव में सुकड़ी नदी के कैचमेंट एरिया में बिना रेत पुनर्भरण (कूलिंग ऑफ पीरियड) के अवैध बजरी खनन पट्टे जारी करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल एवं जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, खनन विभाग, जिला कलेक्टर पाली और खनन पट्टाधारक को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब तलब किया है। जनहित याचिका धन्नाराम उर्फ धनराज सोलंकी व अन्य किसानों व निवासियों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेश परिहार एवं कुलदीप प्रजापत ने पक्ष रखा। नदी के किनारे 9 हजार से अधिक आबादी वाला बूसी गांव है। ग्रामीणों के करीब 400 सिंचाई कुएं इसी नदी के स्पंज (भूजल रीचार्ज) पर निर्भर हैं। ऊपरी हिस्से में केवाली व कोलार एनीकट होने से नदी में बजरी का प्राकृतिक रीचार्ज शून्य है। यदि नदी से रेत हटाई गई, तो वाटर टेबल गिरने और 40 फीट के नीचे का पानी खारा होने से कृषि व पेयजल स्रोत पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। अब उत्तरदाताओं को 4 सप्ताह में हलफनामा पेश करना होगा। याचिका में आरोप है कि पर्यावरण स्वीकृति के लिए अप्रचलित समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया। 25 जुलाई 2025 की जनसुनवाई में 27 लोग उपस्थित दिखाए गए। ग्रामीणों ने 31 जुलाई 2025 को 14 बिंदुओं का आपत्ति पत्र सौंपा और 15 जनवरी व 21 जून 2026 को आपात ग्राम सभाएं कर खनन का पूर्ण बहिष्कार किया। इसके बावजूद 25 फरवरी को एनओसी जारी कर दी। डंपर निकालने के लिए जून 2026 में एनीकट की पाल (बांध) को तोड़ दिया गया। 12 दिसंबर 2023 तक मेसर्स चांडक एसोसिएट्स की खनन लीज थी। लीज खत्म होने के बाद कम से कम 5 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड (पुनर्भरण अवकाश) रखना जरूरी था। आरोप है कि खनन विभाग ने 244.93 हेक्टेयर के क्लस्टर में दो प्लॉट बनाकर खनन लीज नंबर 123 (93.79 हेक्टेयर, बोली 1.60 करोड़ रुपए) और लीज नंबर 129 (98.70 हेक्टेयर, बोली 3.00 करोड़ रुपए) की नीलामी कर दी तथा 22 मई को मेसर्स थार माइंस के पक्ष में लीज जारी कर दी।