अलवर में जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाद राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह ने केंद्र की मोदी और राज्य की भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने पेपर लीक, निकाय-पंचायत चुनाव और नीट मामले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। 'मोदी राज में 150 पेपर लीक, युवाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा' नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि पीएम के आने के बाद से अब तक करीब 150 पेपर लीक हो चुके हैं, लेकिन एक भी मुख्य आरोपी को जेल नहीं भेजा गया। जूली ने कहा कि सोनम वांगचुक 20 दिनों से धरने पर बैठे हैं और राहुल गांधी लगातार युवाओं की आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सरकार सुनने के बजाय युवाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीट रही है। मोदी सरकार हिटलरशाही पर उतर आई है। जो भी आंदोलन करता है, उसे कुचलने की साजिश रची जाती है। अब युवाओं को पीटने के बाद उन पर मुकदमे दर्ज कर देशद्रोही ठहराया जाएगा, लेकिन सरकार जवाब नहीं देगी।" निकाय-पंचायत चुनाव पर बोले- 'बीजेपी का मोरिया बोलना तय' आगामी निकाय और पंचायत चुनावों पर तैयारी का दावा करते हुए जूली ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह मैदान में उतरने को तैयार है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, “सीएम भजनलाल से पूछिए कि उनकी क्या तैयारी है? उन्हें लग रहा था कि चुनाव होंगे ही नहीं, लेकिन अब राजस्थान की जनता इस चुनाव में उनका 'मोरिया' बुला देगी।” 'हाईकोर्ट की फटकार के बाद झुकी सरकार, सूपड़ा साफ होना तय' वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार चुनाव कराने से भाग रही थी। हाईकोर्ट की सख्त फटकार के बाद ही सरकार चुनाव कराने को राजी हुई है। हाईकोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि यह सरकार चुनाव कराने में भी सक्षम नहीं है। 'शिक्षा मंत्री दें इस्तीफा, पीएम बचाने में लगे' नीट पेपर लीक मामले पर भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे देश की जनता इस मुद्दे पर चर्चा चाहती है। नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री को पहले ही दिन इस्तीफा दे देना चाहिए था, लेकिन प्रधानमंत्री उन्हें बचाने में लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले छात्रों और युवाओं के घरों पर पुलिस भेजकर उनके परिजनों को गिरफ्तारी का डर दिखाया जा रहा है। जितेंद्र सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि अहंकारी मोदी सरकार को पहले भी तीन काले कृषि कानून वापस लेने पड़े थे।