गोवंश को बचाने के लिए अलवर से 21 हजार गो भक्त आगे आए हैं। जिन्होंने हस्ताक्षर कर सरकार से गो अभ्यारण्य बनाने की मांग की है। ताकि टाइगर की तरह गायों का संरक्षण हो सके। अलवर के कुछ गो भक्त सोमवार को मिनी सचिवालय पहुंचे। वहां एडीएम को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग की। अलवर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल ने कहा कि गोमाता को लेकर पूरे देश में एक नीति बने। चाहे यूपी हो या केरल हो। यूपी में गोशालाओं में गायों के लिए प्रति गाय 150 रुपए मिलते हैं। जबकि रास्थान में 50 रुपए दिए जाते हैं। जिसके कारण गायों की सुध कम हैं। वहीं राजस्थान में नंदी की बेकद्री है। पंचायत स्तर पर नंदीशाला खोलने का प्रावधान है। लेकिन उस पर सरकार का ध्यान नहीं है। अलवर शहर में गोवंश की दुर्दशा है। अलवर शहर में सार्वजनिक गोशाला है। जिसमें गो संरक्षण हो रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में लावारिश गोवंश घूम रहे हैं। जिसके लिए अलवर शहर के आसपास 25 बीघा जमीन में गोशाला खोलने की जरूरत है। हमने सरकार से जमीन की मांग की है। उसके बाद अलवर शहर के लोगों के सहयोग से पूरा स्ट्रैक्चर खड़ा करेंगे। लेकिन प्रशासन व सरकार को गोवंश की सुध लेने के लिए कुद कदम आगे बढ़ाने की जरूरत है। पहले प्रयास में अलवर के 21 हजार लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। वह ज्ञापन सरकार को भिजवाया है। । विहितप के प्रतिनिधि प्रेम सिंह राजावत ने बताया कि ‘गौ माता सम्मान अभियान’ पूरे देश में चलाया जा रहा है। तहसील स्तर पर ज्ञापन दिए हैं। शहरों में सड़कों पर घूम रहे गोवंश की स्थिति सुधारने की भी मांग उठाई गई है। डॉ. के.के. गुप्ता ने कहा कि गो माता का सम्मान पूरे देश में सुनिश्चित होना चाहिए। गोकशी व तस्करी की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि दूध निकालने के बाद गोवंश को लावारिश न छोड़ा जाए और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाई जाए।