अलवर में अग्रसेन पुलिया के पास गोवंश के अवशेष मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में बुधवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और सर्व हिंदू समाज की ओर से मौन जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारी प्रताप ऑडिटोरियम से सचिवालय गेट पर पहुंचे। उसके बाद वहां पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की कर आगे निकल गए। पुलिसकर्मी देखते रह गए। इस दौरान पुलिस ने बार-बार भीड़ को रोका लेकिन तीन थानों की पुलिस और जाप्ते को धक्का देकर लोग कलेक्ट्रेट के गेट पर बैठ गए। पहले देखिए घटना के PHOTOS… मौके पर कोतवाली, अरावली विहार सहित तीन थानों की पुलिस थी। लेकिन प्रदर्शनकारियों को मिनी सचिवालय के मुख्य गेट पर नहीं रोक सकी। कुछ देर बाद एसपी सुधीर चौधरी भी मिनी सचिवालय पहुंच गए। विहिप के प्रतिनिधि प्रेम राजावत ने मिनी सचिवालय में कहा कि पुलिस प्रशासन तस्करों से मंथली लेता है। इसलिए उनको बचाने का प्रयास हो रहा। लेकिन हम आगे अलवर बंद कराएंगे। पीछे हटने वाले नहीं हैं। इसके बाद एडीएम योगेश डागुर को ज्ञापन दिया गया। विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने प्रशासन को मुख्य गेट पर बुलाने का आग्रह किया। लेकिन तहसीलदार के आने के बाद विहिप के कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने तहसीलदार को वापस भेज दिया। उसके बाद धक्कामुक्की कर अंदर आ गए। विहिप का कहना है कि वह प्रशासन की जांच और कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, जबकि पुलिस इस मामले में दो बार खुलासा कर चुकी है। मंगलवार देर रात जारी प्रेस नोट में एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। जांच में सामने आया कि अवशेष वहां पहले से मौजूद नहीं थे, बल्कि कुत्तों द्वारा खींचकर लाए गए थे। हालांकि वे कहां से लाए गए, इसकी जांच अभी जारी है। इसके अलावा एफएसएल और मेडिकल रिपोर्ट में भी स्पष्ट हुआ है कि गौवंश के अवशेष किसी धारदार हथियार या नुकीली वस्तु से नहीं काटे गए हैं। इससे यह संकेत मिला कि मांस के टुकड़े कुत्तों द्वारा ही लाए गए थे। वहीं विहिप के प्रांत सह-प्रमुख प्रेम सिंह राजावत ने कहा कि संगठन पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है, इसलिए विरोध प्रदर्शन कर गोवंश को न्याय दिलाने की मांग की जाएगी।