अलवर में विजयादशमी पर इस बार रावण दहन का नजारा खास होने वाला है। दशहरा मैदान में 65 फीट ऊंचे रावण, 60 फीट के कुंभकरण और 55 फीट के मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार पुतलों में आधुनिक तकनीक और विशेष लाइटिंग का इस्तेमाल होगा। पुतलों की आंखें, हाथ और सिर हिलेंगे, जबकि रावण की जीभ से चिंगारियां निकलती दिखाई देंगी। इतना ही नहीं, तीनों पुतलों का दहन रिमोट से किया जाएगा। आयोजन को भव्य बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अलवर पुरुषार्थी समिति के अध्यक्ष कुलदीप कालरा ने विजयादशमी पर्व की तैयारियों को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी दशहरा पर्व को आकर्षक बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इस बार पुतलों की बनावट से लेकर आतिशबाजी तक में कुछ नया करने का प्रयास किया जा रहा है। आगरा में तैयार हो रहे पुतले, गाजियाबाद के कारीगर करेंगे आतिशबाजी समिति अध्यक्ष ने बताया कि रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले आगरा में तैयार करवाए जा रहे हैं। वहीं, आकर्षक आतिशबाजी की व्यवस्था के लिए गाजियाबाद से कारीगर बुलाए गए हैं। पुतलों में विशेष लाइटिंग के साथ ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनकी आंखें, हाथ और सिर हिलते नजर आएंगे। रावण की जीभ से चिंगारियां निकलने का दृश्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। एक पुतले के निर्माण पर करीब ढाई से तीन लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से तीनों पुतलों को तैयार करने पर लगभग साढ़े सात से नौ लाख रुपए खर्च होंगे। आतिशबाजी और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च इसके अतिरिक्त होगा। पिछले साल बारिश से हुई थी देरी, इस बार रिमोट से दहन पिछले साल बारिश के कारण पुतलों के दहन में करीब 10 से 15 मिनट की देरी हुई थी। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए रिमोट तकनीक से दहन की व्यवस्था की जा रही है। समिति का प्रयास है कि निर्धारित समय पर पुतलों का दहन हो और कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न कराया जा सके। 50 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद, 5 हजार के बैठने की व्यवस्था दशहरा मैदान में विजयादशमी के अवसर पर करीब 50 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। दर्शकों की सुविधा के लिए लगभग 5 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम और यूआईटी का सहयोग लिया जा रहा है। अग्निशमन, चिकित्सा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।